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चीन के साथ अपने संबंधों को नए तरीके से गढ़ रहा भारत, बोले पीयूष गोयल

Published: Wed, 14 Oct 2026 11:34 PM (IST)

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत चीन के साथ अपने संबंधों को नए तरीके से गढ़ रहा है, लेकिन इसका अंतिम अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है।

चीन के साथ अपने संबंधों को नए तरीके से गढ़ रहा भारत।

चीन के साथ अपने संबंधों को नए तरीके से गढ़ रहा भारत।

HighLights

  1. भारत चीन के साथ संबंधों को नए तरीके से गढ़ रहा है।

  2. अमेरिका के साथ भारत के संबंध पहले से ही बहुत अच्छे हैं।

  3. कोविड अनुभव से 'आत्मनिर्भर भारत' की प्रेरणा मिली।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत चीन के साथ अपने संबंधों को नए तरीके से गढ़ने पर काम कर रहा है, लेकिन इस यात्रा का अंतिम अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है। अमेरिका के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि ये संबंध पहले से ही बहुत अच्छे हैं। अभी भी उन्हें कोई समस्या नहीं दिखती।

उनकी राय में भारत के अमेरिका के साथ संबंध बहुत ठोस हैं और दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि दोनों ही बड़े लोकतंत्र हैं। उन्हें नहीं लगता कि दुनिया के बाकी देशों को इस बारे में चिंता करने की जरूरत है।

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में अपने संबोधन में पीयूष गोयल ने कहा, 'हम दुनिया के सभी देशों के साथ काम करने को तैयार हैं, बशर्ते समझौतें उचित हों, आपसी जुड़ाव में निरंतरता बनी रहे और भू-राजनीतिक स्थिति खराब न हो। मुझे लगता है कि अतीत में हमारी कुछ चिंताएं थीं। हम चीन के साथ एक बार फिर संबंध विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन इस सफर का अंतिम अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है।'

2020 में गलवन घाटी में हुई झड़पों के बाद दोनों देशों के संबंधों में आई गंभीर खटास को दूर करने के लिए पिछले कुछ महीनों में कई कदम उठाए गए हैं। 12 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से कहा था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता भारत-चीन संबंधों के विकास के लिए आवश्यक आधार है।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर प्रगति का भी स्वागत किया था। दोनों नेताओं की मुलाकात पिछले महीने यहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई थी।

पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के चलते चार वर्षों से अधिक समय तक संबंधों में तनाव रहने के बाद गतिरोध खत्म होने पर अक्टूबर, 2024 में मोदी-चिनफिंग की रूस के शहर कजान में मुलाकात हुई थी। इसके बाद दोनों देशों ने संबंध सुधारने की शुरुआत की थी।

गोयल की टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। भारत ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर बार-बार चिंता जताई है।

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 के 118.39 अरब डॉलर से 7.9 प्रतिशत बढ़कर 2025-26 में 127.7 अरब डॉलर हो गया। चीन को भारत का निर्यात 2024-25 के 14.25 अरब डॉलर से 36.62 प्रतिशत बढ़कर 2025-26 में 19.47 अरब डॉलर हो गया।

वहीं, इस अवधि में आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.62 अरब डॉलर हो गया। व्यापार घाटा पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर 99.19 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 85 अरब डॉलर था। यह देश के लिए एक चिंता का विषय है। चीन से निवेश से जुड़े मुद्दे भी हैं, क्योंकि भारत ने अपने साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति सख्त कर दी है।

मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों पर बात करते हुए गोयल ने कहा, 'हर किसी ने मित्र देशों के महत्व को समझा है और आने वाले वर्षों में यह सबसे अहम तत्व होगा।'

कोविड काल को याद करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उस दौरान भारत ने 100 से अधिक देशों को खाद्यान्न और टीके मुहैया कराए, लेकिन ज्यादातर देशों ने हमें बुरी तरह निराश किया। उन्होंने कहा, 'कोविड के दौरान हमने वास्तव में यह समझा कि आपूर्ति शृंखलाएं टूटने पर भारत जैसे 1.4 अरब लोगों के बड़े देश को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

कोविड के दौरान हमारी जरूरतें पूरी करने के लिए हमें पर्याप्त सामग्री नहीं मिली। व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों, कोविड किट या टीकों के लिए हमने जहां भी आर्डर दिए, वहां सभी देशों ने हमें बुरी तरह निराश किया। जब हमें फाइजर और मोडर्ना के टीकों की जरूरत थी, तब पश्चिमी देशों ने उन्हें देने से इनकार कर दिया।

उन्होंने भारतीय बाजार में टीका लाने के लिए आवेदन को भी खारिज कर दिया, जबकि हम सभी शर्तों में छूट देने को तैयार थे। इस अनुभव के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया।'

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)