अमेरिकी टैरिफ पर भारत का कड़ा रुख, कहा- 140 करोड़ भारतीय सबसे पहले
अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने के प्रस्ताव पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है।
-1789666990937_m.webp)
HighLights
अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव किया
भारत ने 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता बताया
भारत अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। अमेरिका ने एक बार फिर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता पर बड़ा हमला किया है। अमेरिकी कांग्रेस ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ कर दिया है, जिसमें भारत और चीन प्रमुख निशाने पर हैं।
भारत सरकार ने भी अमेरिका के इस फैसले पर दो टूक कहा है कि उसके लिए 140 करोड़ भारतीय सबसे पहले हैं और वह उनकी ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगी। जहां से जरूरी होगा, वहां से तेल खरीदेंगे।
सरकार अपने आर्थिक व कारोबारी हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। भारत ने अमेरिकी पक्ष के समक्ष एकदम स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह के कदम से द्विपक्षीय संबंधों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव
अमेरिकी संसद से 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने संबंधी पारित कानून पर भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया- "भारत सरकार ने अमेरिकी कांग्रेस में सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट के पारित होने को नोट किया है।
हम इस मामले में आगे के घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं। जैसा कि पहले कई बार कहा गया है, भारत अपने 1.40 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
वह विविध स्रोतों से और बाजार की बदलती परिस्थितियों के आधार पर यह काम जारी रखेगा।' भारत की तरफ से यह भी बताया गया कि इस मुद्दे पर हाल के महीनों में अमेरिका के विभिन्न वार्ताकारों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा हुई है और भारत की ओर से द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर इसके संभावित प्रभावों को साफ-साफ रखा गया है।
भारतीय पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभावों से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी।
हाउस आफ रिप्रेजेंटेटिव्स में विधेयक पास, गेंद अब ट्रंप के पाले में
अमेरिका के हाउस आफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले भारत, चीन जैसे देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से संबंधित विधेयक को 159 के मुकाबले 262 वोटों से पास कर दिया है। इसके पहले अगस्त 2026 में सीनेट में उक्त विधेयक 86-11 वोटों से पारित हो चुका है। इसके बाद अब गेंद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के पाले में है।
ट्रंप के पास अधिकार है कि वह इस विधेयक के प्रस्ताव के मुताबिक रूस से तेल खरीदने वाले देशों से आयातित उत्पादों पर शुल्क लगा भी सकते हैं, प्रस्तावित दर को कम भी कर सकते हैं या किसी देश को छूट भी दे सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप के अब तक के समर्थन को देखते हुए, वह इसे अनुमति दे सकते हैं। यह विधेयक न सिर्फ रूसी कंपनियों और वहां से उत्पादित तेल पर प्रतिबंध लगाने की राह खोलता है, बल्कि अगर किसी छद्म आयल टैंकर से रूसी तेल का कारोबार हो रहा है तो उस पर भी प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था है।
भारत पर अगस्त 2025 में भी लगाया था 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ
अगस्त 2025 में अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था। यह शुल्क भारतीय सामानों पर पहले से लगे 25 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ के अलग था, जिससे कुल टैरिफ कुछ उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। फरवरी 2026 में ट्रंप प्रशासन ने 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ हटा दिया था।
चीन का भी कड़ा ऐतराज, कहा- ऐसे एकतरफा प्रतिबंधों का कोई आधार नहीं
उधर, चीन ने भी अमेरिकी सीनेट में पारित विधेयक पर कड़ा ऐतराज जताया है। चीन ने कहा है कि अन्य देशों के साथ उसका आर्थिक और व्यापारिक सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता।
चीनी विदेश मंत्रालय ने इस कदम को अमेरिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर का बताया है और कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आदेश के बिना लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है।
रूस जितना तेल वैश्विक बाजार में बेच रहा, उसका 80 प्रतिशत चीन-भारत आ रहा
भारत और चीन रूस से कितना तेल खरीदते हैं, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। लेकिन केपीएलआर नाम की अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2026 में भारत ने रूस से 16 लाख बैरल प्रति दिन और चीन ने 12 लाख बैरल प्रति दिन क्रूड खरीदा है। मोटे तौर पर रूस जितना तेल वैश्विक बाजार में बेच रहा है, उसका 80 प्रतिशत चीन और भारत के पास आ रहा है।
