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'अफवाहों पर आधारित टिप्पणियों से घट रही यूएन की साख', UN की रिपोर्ट पर भारत की दो टूक

Published: Sat, 17 Oct 2026 07:35 PM (IST)

भारत ने संयुक्त राष्ट्र की उस विशेष रिपोर्ट को खारिज कर दिया है जिसमें युवाओं के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर दमन ...और पढ़ें

भारत ने यूएन की युवा प्रदर्शनों पर रिपोर्ट को नकारा

भारत ने यूएन की युवा प्रदर्शनों पर रिपोर्ट को नकारा

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में युवाओं के शांतिपूर्ण प्रदर्शन और उनसे जुड़े अधिकारों पर एक विशेष रिपोर्ट की टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र की विशेष रिपोर्टर (जांचकर्ता) जिना रोमेरो की इस रिपोर्ट में भारत के युवाओं द्वारा शुरू किए गए व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का जिक्र किया गया था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि भारत के युवा मानसिक स्वास्थ्य या लैंगिक न्याय जैसे मुद्दों पर बात करने पर विरोध का शिकार होते हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में रिपोर्ट ने सिर्फ बेनामी तथ्यों का हवाला दिया था।

भारत के प्रतिनिधि और फर्स्ट सेक्रेटरी अनुज स्वरूप ने यूएन महासभा की तीसरी समिति में इस रिपोर्ट को “अफवाहों को संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का जामा पहनाने” वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी के खिलाफ बिना सत्यापित और गुमनाम दावों के आधार पर लगाया गया आरोप सबूत नहीं है। स्वरूप ने कहा कि इसी तरह की मनमानी रिपोर्टिंग की वजह से संयुक्त राष्ट्र और उसकी संस्थाओं की साख घट रही है।

उन्होंने सवाल किया कि “किस दमनकारी राज्य में एक व्यंग्यात्मक युवा पार्टी सरकार पर सवाल उठाती है, राजधानी में मार्च करती है और फिर वरिष्ठ राष्ट्रीय नेताओं के साथ बातचीत करने बैठती है?” भारतीय प्रतिनिधि ने यहां सीजेपी की तरफ से आंदोलन करने और उनके प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों की तरफ से आमंत्रित किये जाने का जिक्र किया है।

दूसरी ओर, भारत विरोधी गतिविधियों के लिए जाने जाने वाले कुछ अमेरिकी सांसदों ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि जब रूबियो मुंबई में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करें, तो भारत में युवा प्रदर्शनों पर कथित दमनकारी कार्रवाई का मुद्दा उठाएं। हाल के दिनों में अमेरिका में कुछ सांसदों की तरफ से भारत में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों के मुद्दे को हवा दी जा रही है।

जबकि भारत ने साफ तौर पर कहा है कि वह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहां हर व्यक्ति को अपनी आवाज उठाने का पूरा मौका मिलता है। भारतीय संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति, एकत्र होने और संघ बनाने की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जिसकी रक्षा स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र प्रेस और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग करते हैं।

भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि उसके आंतरिक मामलों में किसी बाहरी पक्ष को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। भारत ने यूएन और बाहरी टिप्पणियों को अफवाहों पर आधारित और बिना ठोस सबूत वाला बताते हुए खारिज कर दिया है।