'दिल्ली पर तुरंत चिंता, PoK और फ्रांस में दमन पर मौन क्यों?' OHCHR के दोहरे मापदंड पर भारत ने उठाया सवाल
भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की दिल्ली में हुए घटनाक्रम पर व्यक्त चिंताओं को सख्ती से खारिज ...और पढ़ें

OHCHR के दोहरे मापदंड पर भारत ने उठाया सवाल (फोटो- PTI)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) द्वारा कल नई दिल्ली में हुए घटनाक्रम पर व्यक्त चिंताओं को सख्ती से खारिज करते हुए बेहद तीखी और स्पष्ट प्रतिक्रिया जारी की है। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि ओएचसीएचआर की टिप्पणियां अवांछित हैं और भारत के आंतरिक मामलों में इस हस्तेक्षप को अस्वीकार्य करार दिया है।
ओएचसीएचआर ने एक दिन पर पहले भी एक बयान जारी किया था जिसमें दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आह्वान पर हुए प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर हिरासतों पर आपत्ति जताई गई थी।
यूएन के इस एजेंसी ने प्रदर्शनकारियों, नेताओं, नागरिक समाज सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों की हिरासत पर चिंता जताई थी तथा शांतिपूर्ण सभा के अधिकार के सम्मान और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों की तुरंत रिहाई की मांग की थी।
भारत ने ओएचसीएचआर के दोहरे मापदंडों की ओर स्पष्ट संकेत करते हुए पड़ोस तथा अपने आसपास की स्थितियों का जिक्र किया। बयान में कहा गया कि हमारे पड़ोस में विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक प्रतिक्रियाओं पर ओएचसीएचआर मौन रहा है, जबकि अपने आसपास के क्षेत्रों में कानून प्रवर्तन कार्रवाइयों पर भी कोई टिप्पणी नहीं की गई।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में महीनों से चल रहे आंदोलनों की तरफ से भारत का इशारा है। वहां बिजली बिल, आटे की कीमतें, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और शासन सुधारों की मांग को लेकर व्यापक प्रदर्शन हुए, जिनका जवाब पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हिंसक दमन, इंटरनेट ब्लैकआउट, गिरफ्तारियों और आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगाकर दिया।
कई रिपोर्टों में दर्जनों मौतों, सैकड़ों गिरफ्तारियों और नागरिकों पर बल प्रयोग का उल्लेख है, फिर भी ओएचसीएचआर की ओर से समान तीव्रता की सार्वजनिक आपत्ति नहीं आई।
दूसरी ओर, फ्रांस में हाल ही में स्कूली स्थितियों में सुधार की मांग को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बड़े प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा टीयर गैस, स्टन ग्रेनेड और अन्य बल प्रयोग की घटनाएं सामने आईं। इनमें एक किशोर का हाथ कटने जैसी गंभीर चोटें और हजारों गिरफ्तारियां (जिनमें अधिकांश नाबालिग) शामिल हैं।
वैसे ओएचसीएचआर ने कुछ चिंता व्यक्त की थी लेकिन भारत का संकेत है कि दिल्ली की स्थिति पर तुरंत और जोरदार प्रतिक्रिया देने वाली एजेंसी ने इन मामलों में उतना उत्साह नहीं दिखाया। भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) की तरफ से जारी प्रतिक्रिया में कहा गया है कि, ऐसे दोहरे मानक ओएचसीएचआर की विश्वसनीयता को क्षीण करते हैं और बहुपक्षवाद में विश्वास को कमजोर करते हैं।”
भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां शांतिपूर्ण सभा का अधिकार संविधान द्वारा गारंटीकृत है और मजबूत संस्थाओं, स्वतंत्र न्यायपालिका तथा स्वतंत्र मीडिया द्वारा सुरक्षित है। किसी भी लोकतंत्र की तरह भारतीय नागरिक यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने की शर्त पर प्रयोग करते हैं।
हमारे कानून प्रवर्तन अधिकारी सख्ती से कानून के अनुसार कार्य करते हैं और किसी भी शिकायत के निवारण के लिए न्यायालय सभी के लिए उपलब्ध रहते हैं। ओएचसीएचआर से अपेक्षा की जाती है कि वह निष्पक्षता के साथ अपने जनादेश के अनुरूप कार्य करे, बजाय कि एक लोकतंत्र की आंतरिक प्रक्रियाओं पर एकतरफा टिप्पणी करे।
