मस्क के आरोपों के बीच मैदान में कूदी जियो, 1600 सैटेलाइट और 23 ग्राउंड स्टेशन का विजन किया पेश
भारत सरकार ने एलन मस्क के स्टारलिंक को लेकर भारतीय उद्योगपतियों पर लगाए गए एकाधिकार के आरोपों को खारिज किया ...और पढ़ें

जियो भी सैटेलाइट संचार में उतरा

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जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भारत सरकार ने अमेरिकी कंपनी स्टारलिंक के प्रमुख एलन मस्क के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया था कि कुछ भारतीय उद्योगपति उनकी कंपनी स्टारलिंक की सैटेलाइट संचार सेवाओं को भारत में शुरू करने की राह में अड़चन डाल रहे हैं ताकि अपना एकाधिकार बनाए रख सकें।
दूरसंचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश में सैटेलाइट संचार समेत सभी टेलीकाम सेवाओं के लिए निष्पक्ष व गैर-भेदभावपूर्ण नियमन ढांचा है और भेदभाव का आरोप आधारहीन है।
भारत सरकार के बयान के कुछ घंटे बाद मस्क ने एक्स पर फिर लिखा कि भारत में जहां मोबाइल कनेक्शन नहीं हैं या कमजोर हैं, वहां स्टारलिंक बहुत मददगार साबित हो सकती है।
मस्क के आरोप पर भारत में बहस छिड़ गई है। इसी बीच रिलायंस समूह की कंपनी जियो ने भी सैटेलाइट संचार में उतरने की घोषणा कर दी है। कंपनी करीब 1,600 सैटेलाइट लॉन्च करने, भारत में 23 ग्राउंड स्टेशन तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी सभी छह लाख गांवों तक सेवा पहुंचाने का विजन लेकर आगे बढ़ रही है।
कंपनी का विजन डिजाइन, इंजीनियरिंग, इंटीग्रेशन और टेस्टिंग से लेकर लांच, डिप्लायमेंट व आपरेशन तक पूरी शृंखला का नियंत्रण भारत में रखने का है। यानी सैटेलाइट मोबिलिटी में भारत को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना। कई लोग मानते हैं कि सुरक्षा कारणों से भारत सरकार मस्क की स्टारलिंक योजना को लेकर बहुत उत्साहित नहीं है।
सरकार ने स्टारलिंक, जियो सैटकाम और यूटेलसैट वनवेब- तीनों कंपनियों को भारत में परिचालन शुरू करने के लिए लाइसेंस दे दिए हैं। हालांकि सेवा शुरू करने से पहले सभी को स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा मंजूरी की जरूरत है। लाइसेंस की शर्तों के तहत हर लाइसेंसधारी को सुरक्षा मानकों का अनुपालन प्रदर्शित करना अनिवार्य है, ताकि उपयोगकर्ताओं और उनके डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। मंत्रालय ने कहा कि तीनों लाइसेंसधारियों के मामले में अभी सुरक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही किसी के लिए प्रक्रिया पूरी होगी, वह स्पेक्ट्रम आवंटन के अगले चरण में बढ़ सकती है। फिलहाल तीनों कंपनियां एक ही नियमन के तहत आती हैं।
मस्क ने बुधवार को एक्स पर एक पोस्ट के जवाब में आरोप लगाया था, 'दुर्भाग्य से हमें कुछ उद्योगपतियों द्वारा रोका जा रहा है ताकि वे भारतीय लोगों पर अपना एकाधिकार बनाए रख सकें। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं, यह भारत के लोगों के विरुद्ध अपराध है।'
एक पोस्ट में दावा किया गया था कि मई, 2026 तक भारत के 11,256 गांवों में 4जी कवरेज नहीं था।
