नई दिल्ली, प्रेट्र। Indian Railway News, पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में डीजल से इलेक्ट्रिक में बदले पहले इंजन को हरी दिखाई गई थी। अब रेलवे अपनी इस योजना पर पुनर्विचार कर रहा है। रेलवे अपनी इस योजना पर पुनर्विचार कर रहा है कि पुराने हो रहे डीजल इंजनों को इलेक्ट्रिक इंजनों में बदलना आर्थिक और तकनीकी रूप से सर्वश्रेष्ठ तरीका है अथवा नहीं। रेलवे ने 2018 में कहा था कि वह अपने सभी डीजल इंजनों को इलेक्ट्रिक इंजनों से बदलने की योजना बना रहा है।ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने कहा कि इस योजना के फायदे और नुकसान का आकलन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है जिसके 15 अगस्त तक रिपोर्ट देने की संभावना है।

बता दें कि पिछले साल फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में डीजल से इलेक्ट्रिक में बदले गए पहले इंजन को हरी झंडी दिखाई थी। अभी तक तीन डीजल इंजनों को इलेक्ट्रिक में बदला गया है जिसमें से प्रत्येक पर दो करोड़ रुपये की लागत आई है। वीके यादव ने बताया कि रेलवे अपने डीजल इंजनों को पड़ोसी देशों को निर्यात करने पर भी चर्चा कर रहा है।

रेलवे ने नहीं की किसी भी नई ट्रेन की घोषणा

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी.के. यादव ने इसके साथ ही शुक्रवार को बताया कि रेलवे ने 230 ट्रेन सेवाओं के अलावा किसी भी नई ट्रेन सेवाओं की घोषणा नहीं की है। उन्होंने बताया कि कई राज्य सरकारों ने कोरोना वायरस के हालात के मद्देनजर ट्रेनों के फेरों में कमी की है। इसके साथ ही ट्रेनों के रुकने को भी रद किया जा रहा है। एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वीके यादव ने कहा कि हम राज्य सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं, और राज्य में कोरोना वायरस की स्थिति के आधार पर हम कुछ ट्रेनों को रद करने, ट्रेनों के फेरे कम करने और कभी ट्रेनों के स्टॉपेज को भी रद करते हैं। 

Posted By: Shashank Pandey

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