पश्चिम एशिया संकट: भारत की सफल कूटनीति, तेहरान से 640 भारतीय जल्द लौटेंगे वतन
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ईरान से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने में सक्रिय है। भारतीय दूतावास जोखिम भरे ...और पढ़ें

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप के आह्वान को भारत का जवाब

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत की कूटनीति और दूतावासी तंत्र सक्रियता के साथ कुछ ऐसा काम कर रही है जो सामान्य तौर पर असंभव था।
ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को सड़क मार्ग से अर्मेनिया भी पहुंचाया जा रहा है और अरजबेजान भी। ना सिर्फ ये दोनों देश एक दूसरे के दुश्मन हैं बल्कि भारत के साथ अजरबेजान के संबंध काफी खराब रहे हैं। आपरेशन सिंदूर के दौरान अरजबेजान ने खुल कर पाकिस्तान का साथ दिया था।

ईरान से निकाले गये 640 भारतीय
इसके बावजूद पिछले दो दिनों में ईरान से 550 भारतीयों को सुरक्षित अर्मेनिया और 90 भारतीयों को अजरबेजान पहुंचाया गया है, जहां से उन्हें आगे सुरक्षित स्थानों पर भेजने की व्यवस्था की जा रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बताया कि, “जितने भारतीय नागरिकों को बाहर निकाला गया है तेहरान से उनमें से 284 धार्मिक यात्रा पर गये श्रद्धालु हैं।
ईरान में तकरीबन 9,000 भारतीय रहते हैं जिनमें से ज्यादातर छात्र हैं। इसके अलावा कुछ कारोबारी, धार्मिक यात्री, समुद्री जहाजों पर काम करने वाले आदि हैं। मौजूदा हालात में भारतीय मिशन की प्राथमिकता छात्रों और अन्य संवेदनशील समूहों को पहले सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।'

सूत्रों के अनुसार तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी अत्यंत जोखिम भरे माहौल में लगातार काम कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद ईरान में सुरक्षा स्थिति अस्थिर हो गई है और संचार व्यवस्था भी लगभग ठप हो चुकी है। कई क्षेत्रों में केवल सरकारी अनुमति से ही संचार स्थापित किया जा पा रहा है। इससे दूतावास के कर्मचारियों का काम ज्यादा जटिल हो गया है।
सड़क मार्ग से पड़ोसी देशों का रास्ता तय
भारतीय दूतावास पहले छात्रों और अन्य भारतीयों को देश के भीतर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम करता है और उसके बाद फिर उन्हें सड़क मार्ग से पड़ोसी देशों तक निकालने की व्यवस्था कर रहा है। साथ ही उनकी स्थिति की जानकारी उनके परिवारों तक पहुंचाने की कोशिश भी की जा रही है।
पश्चिम एशिया में विवाद शुरू होने के बाद कई विदेशी सरकारों ने सुरक्षा कारणों से तेहरान से अपना राजनयिक संचालन या तो बंद कर दिया है या उसे सीमित कर दिया है। इसके बावजूद भारतीय दूतावास सक्रिय रूप से काम कर रहा है और भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए पूरी क्षमता से तैनात है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार दोनों पक्षों के साथ संतुलन बनाए रखने और स्थिति को शांत करने के प्रयासों में भी सक्रिय है। विदेश मंत्री एस जयशंकर लगातार खाड़ी क्षेत्र के विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी पश्चिम एशिया क्षेत्र के कई शीर्ष नेताओं से बातचीत कर चुके हैं, ताकि संकट का कूटनीतिक समाधान निकल सके और क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे।
ट्रंप के बयान पर भारत का जवाब
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित रखने के लिए कई देशों से अपने युद्धपोत भेजने की अपील की है। इस पर विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ इस बारे में कोई बातचीत नहीं की है।

