साइबर सुरक्षा के लिए 13 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत, डीपीडीपी कानून अगले से होगा लागू
इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्रालय के संयुक्त सचिव के.के. सिंह ने बताया कि देश को साइबर हमलों से निपटने के लिए ...और पढ़ें

साइबर सुरक्षा के लिए 13 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत।
HighLights
देश में 13 लाख साइबर सुरक्षा प्रोफेशनल्स की आवश्यकता है।
डिजिटल प्रोटेक्शन डाटा प्रोटेक्शन कानून अगले साल होगा लागू।
एआई का उपयोग साइबर हमलों और डीपफेक में बढ़ रहा है।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। इलेक्टॉनिक्स व आईटी मंत्रालय के संयुक्त सचिव के के सिंह ने कहा कि अभी देश में साइबर हमले से बचने के लिए पांच लाख प्रोफेशनल्स काम कर रहे हैं जबकि इस जोखिम से मुकाबले के लिए 13 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत है।
मंगलवार को ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (टीपीसीआई) की तरफ से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की उपयोगिता और साइबर सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर आयोजित एक कार्यक्रम में सिंह ने कहा कि अभी हमारे देश में साइबर सुरक्षा को लेकर अलग से कोई कानून नहीं है, लेकिन जरूरत पड़ी तो अलग से कानून भी बनाया जा सकता है।
वर्तमान में आईटी नियम के आधार पर साइबर हमलों से निपटा जाता है। कई साइबर हमलों की तो जानकारी सामने नहीं आती है।
सिंह ने बताया कि उनके मंत्रालय ने डिजिटल प्रोटेक्शन डाटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून को अधिसूचित कर दिया है और अगले साल मध्य से यह कानून अमल में आ सकता है। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत इस कानून के मुताबिक अपनी तैयारी शुरू कर दिए होंगे और इस नियम के मुताबिक काम करने के लिए उद्योग जगत ऐसे सोल्यूशन लेकर आएंगे जो सस्ते होंगे।
इस मौके पर टीपीसीआई के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि 47 प्रतिशत संस्थाएं एआई जेनरेटिव का इस्तेमाल कर रहे हैं और 93 प्रतिशत संगठन अगले 12 से 18 महीनों में एआई का इस्तेमाल शुरू करने जा रहे हैं। एआई का इस्तेमाल डीपफेक और साइबर हमले में भी किया जा रहा है।
वर्ष 2024 में साइबर फ्राड के कारण भारत में 22,845 करोड़ का नुकसान हुआ। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि डीपफेक के इस्तेमाल से कितना बड़ा फ्रॉड हो रहा है। डीपफेक के आधार पर अब सामूहिक नुकसान पहुंचाने का काम शुरू हो चुका है।
