नारायणपुर, राज्‍य ब्‍यूरो। अबूझमाड़ देश का सबसे ज्‍यादा नक्‍सल प्रभावित इलाका है। छत्‍तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में बसे अबूझमाड़ में नक्‍सलियों को ऐसा खौफ है कि यहां एक दवा की दुकान तक नहीं थी। बता दें कि यहां चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा की हालात बेहत ही खराब है। नक्‍सलियों के खौफ के आगे यहां किसी की हिम्‍मत भी नहीं होती थी, मगर अब यहां माड़िया आदिवासी समुदाय की एक युवती ने दवाई की दुकान स्थापित कर साहसिक पहल की है।

दवाई दुकान खोलकर पेश की मिसाल
ओरछा विकास खण्ड मुख्यालय में पहली दवा दुकान की स्थापना कुमारी किरता दोरपा ने की है। उन्होंने दुर्गम क्षेत्र मे पहली दवाई की दुकान खोलकर नई मिसाल पेश की है। वैसे तो सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ओरछा में मरीजों को सभी आवश्यक दवाई नि:शुल्क मिल जाती हैं, लेकिन कई बार ऐसा भी था कि कई दवाईयों के लिए 70 किलोमीटर दूरी तय कर जिला मुख्यालय नारायणपुर आना-जाना पड़ता था। अब ओरछा क्षेत्र के लोगों को इस दूरी से निजात मिलेगी।

लोगों को होगी सहूलियत
किरता ने परिवार और मित्रों की आर्थिक सहायता और सहयोग से ओरछा में मावा नाम से दवा दुकान खोली है। इस दुर्गम क्षेत्र के अबूझमाड़ियों के लिए यह दवा दुकान जीवनदायनी बनी है। किरता ने बताया कि चारों ओर से घने जगलों-पहाड़ों से घिरे दुर्गम इलाके में दवा दुकान खोलना और उसे चलाना चुनौती पूर्ण काम था।

सभी ने की मदद तब संभव हुआ कठिन कार्य
ओरछा की जनता, सरपंच और सचिव को इस कार्य के लिए हमेशा प्रोत्साहन देते रहे थे। सभी के प्रोत्साहन और आर्थिक मदद से यह कठिन काम संभव हुआ। उनकी दुकान में इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों और जरूरत के हिसाब से लगभग जरूरी दवाईयां उपलब्ध हैं। जिनकी अधिकांश तौर पर जरूरत महसूस होती है। अब लोग डाक्टर की पर्ची लेकर दवाईयां लेने आने लगे हैं। मरीजों और उनके परिजनों की नारायणपुर में दवाईयां लेने आने-जाने में होने वाले खर्च और समय की बचत होने लगी है।

कभी इस इलाके में आने के लिए लेना होता था डीएम का आदेश
इतिहास के पन्‍नों को पलटने से पता चलता है कि बस्तर के चार हजार वर्ग किलोमीटर इलाके में फैले हुए नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के इलाकों में बसने वाले आदिवासी आबादी जरूरत की चीजों से वंचित हैं। 80 के दशक में नक्सलवाद ने इस इलाके में अपने पैर जमाने शुरू किए। यह वहीं दौर था, जब अबूझमाड़ के इलाके में प्रवेश के लिए कलेक्टर से अनुमति लेने का नियम बना। अब इस नियम को खत्म किया गया है। कलेक्टर पीएस एल्मा ने किरता की इस पहल की प्रशंसा की है।

Posted By: Prateek Kumar

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