जाते-जाते मानसून दिखाएगा कड़े तेवर, बंगाल की खाड़ी में बन रह नया सिस्टम, 24 सितंबर को चक्रवात की आशंका
पश्चिमी राजस्थान से 19 सितंबर से मानसून की वापसी शुरू हो सकती है, हालांकि बंगाल की खाड़ी में बन रहा ...और पढ़ें

जाते-जाते मानसून दिखाएगा कड़े तेवर (फाइल फोटो)
HighLights
पश्चिमी राजस्थान से 19 सितंबर से मानसून वापसी संभव
बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम, 24 को चक्रवात आशंका
सितंबर अंत तक कई हिस्सों में बारिश जारी रहेगी
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राजस्थान के पश्चिमी हिस्से से 19 सितंबर से मानसून की वापसी शुरू हो सकती है। जून से 15 सितंबर तक देश में 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है, लेकिन अगले हफ्ते बंगाल की खाड़ी में एक बड़ी मौसम प्रणाली बनने जा रही है।
इससे लौटते मानसून को कुछ दिनों के लिए मजबूती मिल सकती है। मध्य भारत तक पहुंचते-पहुंचते मानसून की वापसी फिर धीमी पड़ सकती है। ऐसे में सितंबर के आखिर तक देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर बना रह सकता है।
स्काईमेट के अनुसार, पिछले दिनों बंगाल की खाड़ी से विकसित हुए सिस्टम ने गुजरात तक मानसूनी गतिविधियों को मजबूती दी थी। इसी बीच उत्तर-पूर्वी अरब सागर में बनी परिस्थितियों के कारण मानसून की वापसी में दो दिन का विलंब हुआ।
गुजरात और कच्छ के पास बना निम्न दबाव क्षेत्र अब उत्तर अरब सागर की ओर बढ़ रहा है। इससे राजस्थान से मानसून की वापसी के लिए अनुकूल स्थितियां बनने लगी हैं। मगर बंगाल की खाड़ी में दो दिन बाद अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में निम्न दबाव क्षेत्र बनने के स्पष्ट संकेत हैं।
स्काईमेट के प्रवक्ता महेश पलावत के मुताबिक आगे चलकर यह समुद्री तूफान में भी बदल सकता है। इसकी ताकत और दिशा का सटीक आकलन अभी जल्दबाजी होगी। 24 सितंबर के आसपास यह चक्रवात का रूप ले सकता है। इसका असर ओडिशा और दक्षिणी बंगाल के तटीय क्षेत्रों में दिखेगा, जिसका असर दिल्ली के करीब तक दिख सकता है।
नई मौसम प्रणाली का मानसून की वापसी पर भी असर पड़ सकता है। दिल्ली से मानसून की सामान्य विदाई 25 सितंबर के आसपास होती है। बंगाल की खाड़ी में सिस्टम मजबूत हुआ तो मध्य और उत्तर भारत में मानसूनी गतिविधियां फिर ठहर सकती हैं और बड़े क्षेत्र में बारिश का असर कुछ समय तक बना रह सकता है।
देश में पहली जून से 15 सितंबर तक कुल बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम रही है। आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश की कमी करीब 51 प्रतिशत है, जबकि ओडिशा में सबसे ज्यादा सामान्य से 21 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। बिहार में अब तक करीब 36 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। नए सिस्टम से देश की कुल बारिश के आंकड़े में कुछ सुधार होने की संभावना है।
उधर, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गुरुवार को कई जगह हल्की बर्फबारी हुई और बारिश से तापमान गिरा। मनाली के रोहतांग पास क्षेत्र में भी बर्फबारी हुई। कश्मीर के गुलमर्ग और गुरेज के ऊंचे इलाकों में इस मौसम की पहली बर्फबारी दर्ज की गई। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम के बदलते मिजाज के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।
