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चीनी कंपनियों के लिए खुलेंगे भारत में सरकारी ठेकों के दरवाजे, पांच साल बाद प्रतिबंध हटाने पर विचार

Published: Thu, 08 Jan 2026 10:55 PM (IST)

भारत सरकार चीनी कंपनियों पर लगे पांच साल पुराने प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रही है, जिससे उन्हें सरकारी ...और पढ़ें

भारत सरकार चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रही

भारत सरकार चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रही

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और अमेरिका में बढ़ती तनातनी के बीच नई दिल्ली ने चीन की कंपनियों के लिए अपना दरवाजा खोलने का फैसला किया है। सूत्रों का कहना है कि भारतीय वित्त मंत्रालय सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाने वाली चीनी कंपनियों पर लगे पांच साल पुराने प्रतिबंधों को हटाने की योजना बना रहा है।

माना जा रहा है कि भारत-चीन सीमा पर जिस तरह तनाव कम हो रहा है, उसे देखते हुए भारत सरकार व्यापारिक संबंधों को तेजी से पटरी पर लाना चाहती है। 2020 में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई झड़प के बाद चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

भारत सरकार चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंध हटाने पर विचार

इसके तहत चीनी कंपनियों को बोली लगाने के लिए भारतीय सरकारी समिति के साथ रजिस्ट्रेशन कराना और राजनीतिक एवं सुरक्षा संबंधी मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया था। इन उपायों के चलते चीनी कंपनियों को भारत सरकार के उन ठेकों के लिए प्रतिस्पर्धा करने से रोक दिया गया था, जिनकी अनुमानित लागत 700 अरब डालर से 750 अरब डालर के बीच थी।

सूत्रों ने बताया कि अधिकारी रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता खत्म करने के लिए काम कर रहे हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय को लेना है। प्रेट्र के अनुसार, गुरुवार को मशीनरी और उपकरण बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें बीएचईएल के शेयर 10 प्रतिशत से अधिक गिर गए।

यह गिरावट उन रिपोर्टों के बीच आई है कि वित्त मंत्रालय सरकारी ठेकों के लिए चीनी कंपनियों की बोली पर प्रतिबंध हटाने की योजना बना रहा है, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने का डर पैदा हो गया है। हिताची एनर्जी इंडिया के शेयर 5.88 प्रतिशत और एबीबी इंडिया के शेयर 4.86 प्रतिशत तक गिर गए।

सरकारी विभागों ने किया है प्रतिबंध हटाने का अनुरोध

सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्रालय ने प्रतिबंधों में ढील देने का फैसला अन्य सरकारी विभागों के अनुरोधों के बाद किया है। इन विभागों को प्रतिबंधों के कारण परियोजना में देरी का सामना करना पड़ रहा है।

पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली एक उच्चस्तरीय समिति ने भी प्रतिबंधों में ढील देने की सिफारिश की है। गौबा एक प्रमुख सरकारी ¨थक टैंक के सदस्य हैं। विद्युत क्षेत्र में चीनी उपकरणों के आयात पर लगाए गए प्रतिबंधों ने अगले दशक में भारत की तापीय ऊर्जा क्षमता को लगभग 307 गीगावाट तक बढ़ाने की योजना में बाधा उत्पन्न की है।

भारत और चीन के संबंधों पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव

पिछले साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सात वर्षों में पहली बार चीन का दौरा किया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय आयात पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ तथा पाकिस्तान-अमेरिका के सुधरते संबंधों के मद्देनजर बीजिंग के साथ गहरे व्यापारिक संबंध विकसित करने पर सहमति जताई।

इसके बाद भारत और चीन ने सीधी उड़ानें फिर से शुरू की और नई दिल्ली ने चीनी पेशेवरों के लिए व्यावसायिक वीजा की मंजूरी में तेजी लाने के लिए प्रक्रियाओं में ढील दी। वैसे तो दोनों एशियाई महाशक्तियों के बीच संबंध सुधरे हैं, लेकिन भारत फिर भी सतर्क है, क्योंकि चीनी कंपनियों के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर प्रतिबंध अब भी लागू है।