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रूसी तेल खरीद पर भारत को राहत के आसार, अमेरिका के 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की संभावना कम; मुंबई में मिलेंगे जयशंकर और रूबियो

Published: Fri, 16 Oct 2026 08:03 PM (IST)

रूसी तेल खरीद पर भारत को अमेरिका से 100 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क से राहत मिलने की संभावना है, भले ही अमेरिकी कानून में इसका प्रावधान हो।

भारत को अमेरिकी टैरिफ से राहत के आसार

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका की तरफ से भारत पर सौ फीसद तक अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावना कम दिख रही है। रूस से तेल खरीदने पर शीर्ष देशों पर 100 फीसद तक शुल्क लगाने को लेकर अमेरिकी संसद से पारित कानून पर राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप हस्ताक्षर कर चुके हैं।

कानून के अनुसार, अधिनियम के प्रभावी होने के एक महीने के भीतर राष्ट्रपति को रूस से सबसे ज्यादा पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले पांच देशों पर सौ फीसदी तक शुल्क लगाने का अधिकार है। यह अवधि 18 अक्टूबर को समाप्त हो रही है।

वैसे यह कानून स्वतः तरीके से लागू नहीं होता और अंतिम निर्णय राष्ट्रपति के विवेकाधीन अधिकार में है। इसी बीच अगले मंगलवार को मुंबई में भारत व अमेरिका के विदेश मंत्रियों की एक खास मुलाकात होने वाली है।

कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका की तरफ से स्वयं रूस से डीजल खरीदने के हालिया फैसले और भारत-अमेरिका संबंधों में पहले से चल रहे कई तनावों को देखते हुए इस बात की संभावना कम है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस तरह का कोई विपरीत कदम उठाएंगे।

खासकर तब जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 18 अक्टूबर को भारत पहुंच रहे हैं। दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत और व्यापार समझौते की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ट्रंप कोई कठोर निर्णय लेने से बच सकते हैं। इस तरह के कदम का द्विपक्षीय संबंधों को और तनावग्रस्त कर सकता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो का यह दौरा मुंबई व जामनगर तक सीमित है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर 20 अक्टूबर को रूबियो के साथ द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे।

जयशंकर अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में विशेष मेहमान के तौर पर उपस्थित होंगे। रूबियो और जयशंकर की वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों के सभी आयामों जैसे ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग पर चर्चा होगी।

साथ ही यह भी बताते चलें कि रूबियो के नई दिल्ली के बजाय मुंबई जाने को विपक्षी पार्टियों के आरोपो को भारत सरकार ने कोई खास तवज्जो नहीं दी है।

जायसवाल ने कहा कि, पिछले एक दशक से विदेशी मेहमानों को देश के विभिन्न शहरों में मेजबानी करने की प्रथा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पेन के प्रधानमंत्री की मेजबानी वडोदरा में, जर्मनी के चांसलर मर्ज की अहमदाबाद में और मॉरीशस के प्रधानमंत्री की वाराणसी में की थी।

विदेश मंत्री ने एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक गोवा में, बोत्सवाना के विदेश मंत्री की मेजबानी केवड़िया में और हार्ट आफ एशिया कांफ्रेंस अमृतसर में आयोजित की थी।

दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा अभी भी कारोबारी समझौता है, जिस पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। ऊर्जा सहयोग, रक्षा साझेदारी और आर्थिक संबंधों पर चर्चा जारी है, लेकिन टैरिफ और व्यापार बाधाएं प्रमुख अड़चन बनी हुई हैं। रूबियो की यात्रा के दौरान इन मुद्दों पर आगे की बातचीत होने की उम्मीद है।