नई दिल्ली, जागरण स्पेशल। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद वर्षों से चला आ रहा है। दोनों देश वास्तविक सीमा रेखा पर बुनियादी ढांचे के निर्माण की एक दूसरे की परियोजनाओं को संदेह की नजर से देखते हैं। सड़कों, पुलों, रेल लिंक, हवाई अड्डों के निर्माण में दोनों ने पूरी ताकत झोंक रखी है। जहां चीन भारत से सटे तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में अब तक कई एयरबेस, 5,000 से अधिक किमी का व्यापक रेल नेटवर्क और 50,000 किमी से अधिक लंबी सड़कों का निर्माण करा चुका है वहीं भारत सामरिक आधारभूत संरचना में ड्रैगन से काफी पीछे है।

निर्माण की होड़ में लगा चीन
भारत के साथ सटी सीमा पर चीन ने 15 प्रमुख हवाई अड्डों और 27 छोटी हवाई पट्टी का निर्माण किया है। इनमें से सबसे खास हर मौसम में उपयोग किया जाने वाला तिब्बत के गोंकर का हवाई अड्डा है, जहां लड़ाकू विमानों की तैनाती की गई है। हवाई क्षेत्रों के अलावा, चीन का तिब्बत और युनान प्रांत में व्यापक सड़क और रेल नेटवर्क है, इसका मतलब यह है कि उसकी सेना केवल 48 घंटों में भारत- चीन सीमा पर पहुंच सकती है।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा
यह चीन की एक बहुत बड़ी वाणिज्यिक परियोजना है। यह गलियारा चीन को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है। यह लगभग 2442 किलोमीटर लंबा है। लेकिन यह गलियारा गुलाम कश्मीर के एक भाग से गुजरता है। यही कारण है कि भारत इस योजना का लगातार विरोध कर रहा है। भारत का मानना है कि यह परियोजना उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करती है।

कहां खड़ा है भारत
भारत ने अब तक केवल 981 किमी से अधिक सड़कों का निर्माण करने में कामयाबी हासिल की है। प्रगति इतनी धीमी है कि गति की वर्तमान दर पर, 3,417 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा सड़क परियोजना, जिसकी मूल समय सीमा 2012 थी अब बढ़ा कर 2022 कर दी गई है। चीन की सीमा से छूती 27 सड़कें अरुणाचल प्रदेश में, पांच सड़कें हिमाचल प्रदेश में, 12 सड़कें जम्मू-कश्मीर में, 14 सड़कें उत्तराखंड में और 3 सड़कें सिक्किम में हैं।  

चीन की चाल पर नजर रखने के लिए भारत उससे लगती सीमाओं पर सड़कों और सामरिक भवनों का जाल बिछाएगा। अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में 25 हजार करोड़ रुपये की लागत से चीन से लगी सीमाओं पर सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण 19 सड़कों और 29 एकीकृत भवनों का निर्माण कराया जाएगा। गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचएलईसी) ने इस पर मुहर लगाई है। अब इसे जल्द ही सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) के सामने रखा जाएगा।

अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में 25 हजार करोड़ की लागत से होगा निर्माण
अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के अलावा गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा में भी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ी परियोजनाओं पर सीसीएस की बैठक में विचार किया जाएगा। पूर्वोत्तर राज्यों में आसन्न खतरों को देखते हुए चीन से लगे सीमावर्ती इलाकों में सड़कों के निर्माण में तेजी लाने का फैसला अहम है। चीनी सैनिक आए दिन भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर जाते हैं। सामरिक दृष्टिकोण से भारत को घेरने की चाल में चीन हमेशा जुटा रहता है।

चीन की सीमा पर सामरिक दृष्टि से अहम 19 सड़कों व 29 एकीकृत इमारतों का होगा निर्माण
सीमा पर सड़कों व इमारतों के निर्माण से न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में नजर रखना आसान होगा, बल्कि आपात स्थिति में कम समय में वहां तक पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी। हालांकि, अरुणाचल और सिक्किम के पहाड़ी व दुर्गम इलाकों में सड़कें-इमारतें बनाना निर्माण एजेंसियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में दो मीटर चौड़ी सड़कों का निर्माण भी शामिल है। इन परियोजनाओं के लिए वन और वन्यजीव से संबंधित मंजूरी मिल गई है। जमीन के अधिग्रहण का मामला भी सुलझ गया है। अब जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

बांग्लादेश से लगे सीमावर्ती राज्यों में बाड़ और सड़कों का होगा निर्माण
चीन के अलावा बांग्लादेश से लगी सीमा पर भी चौकसी बढ़ाने और मजबूत सुरक्षा सुनिश्चित करने की तैयारी है। बांग्लादेश से लगने वाले भारत के सभी राज्यों में सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्माण कार्य कराए जाएंगे। पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा में सीमा पर बाड़ लगाने और सड़कें बनाने का काम किया जाएगा। इससे सीमाओं पर निगरानी रखने और घुसपैठ पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

राजस्थान व गुजरात में पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर सड़कें और चौकियां बनाई जाएंगी
पाकिस्तान से लगने वाले पंजाब और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जाएगा। इन क्षेत्रों में भी आवश्यकता के मुताबिक सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। गुजरात के तटीय इलाकों में भी निगरानी व्यवस्था को पुख्ता बनाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक गुजरात के तटीय इलाकों में 18 चौकियां स्थापित करने का फैसला किया गया है।

Posted By: Sanjay Pokhriyal