जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। यूं तो पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के मुद्दे पर चीन का नजरिया अक्सर भारत को परेशान करता रहा है लेकिन अपने द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने की कवायद को आगे बढ़ाते हुए दिसंबर में भारत और चीन संयुक्त सैन्य अभ्यास 'हैंड इन हैंड' में भाग लेंगे। यह अभ्यास चीन के वूहान में प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शिनफिंग की अनौपचारिक शिखर वार्ता के बाद पुन: पटरी पर लौटे आपसी संबंधों का नतीजा है।

डोकलाम में पैदा हुए गतिरोध के बाद दोनो देशों की सेनाओं के बीच परस्पर विश्वास बढ़ाने, सहयोग की समझ को विकसित करने और उसे मजबूत करने के लिहाज से हैंड इन हैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास का सामरिक हलकों में बड़ा महत्व बताया जा रहा है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच निकटता पूर्ण संबंध बनाना और उसे बढ़ावा देना इस युद्धाभ्यास का लक्ष्य है।

दोनों देशों के बीच सुधर रहे हालात

गौरतलब है कि आए दिन भारत-चीन रिश्तों में होती उठापठक के बाद अब दोनो देशों के बीच हालात सुधर रहे हैं, दोनों पड़ोसी देश संबंधों की मधुरता को प्राथमिकता दे रहे हैं। बावजूद इसके दोनों देशों में कई बार खटास देखने को मिली है। चीन ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में भारत के दाखिल होने का लगातार विरोध तो किया ही है।

देशों की रक्षा सहयोग पर बड़ा कदम

वहीं, इसके अलावा जैश ए मोहम्मद के मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र के जरिए आतंकवादी घोषित कराने की भारत की कोशिश को भी चीन ने वीटो किया है। भारत चीन की महात्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड परियोजना का हिस्सा भी नहीं है। ऐसे में आतंक के मुद्दे पर दोनों देशों की रक्षा सहयोग पर मजबूती सैन्य कूटनीति के लिए बड़ा कदम है।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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