नई दिल्ली [प्रमोद भार्गव]। करीब पांच करोड़ फेसबुक उपयोगकर्ताओं का डाटा चुराकर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दुरुपयोग के खुलासे के बाद अमेरिकी राजनीति में उठा भूचाल भारत भी आ धमका है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने डाटा चोरी को गंभीरता से लेते हुए फेसबुक को चेतावनी दी है कि यदि गलत तरीके से भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई तो उसके मुखिया को भारत तलब किया जाएगा। भारत में फेसबुक के 20 करोड़ यूजर्स हैं। गोया सोशल मीडिया पर मौजूद इस बड़े डाटा का चुनाव अभियान में इस्तेमाल भारतीय लोकतंत्र के लिए नया खतरा साबित हो सकता है। आज फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे कई वेब ठिकाने हैं, जिनके पास करोड़ों लोगों की व्यक्तिगत सूचनाए हैं।

गोपनीयता का भरोसा

हालांकि ये साइट्स गोपनीयता का भरोसा देती हैं, लेकिन फेसबुक का डाटा चुराकर उसका प्रयोग चुनाव प्रचार में करने का जो पर्दाफाश हुआ है, उसने इस भरोसे को तोड़ने का काम किया है। यह खुलासा एक स्टिंग के माध्यम से हुआ है। कैंब्रिज एनालिटिका दुनिया भर के राजनीतिक दलों के लिए चुनाव के दौरान सोशल मीडिया कैंपेन चलाती है। अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए यह फर्म हनीट्रैप, फेक न्यूज जैसे गलत हथकंडे भी अपनाती है। 2016 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव और ब्रिटेन में हुए ब्रेक्जिट के समर्थन में भी इन हथकंडों का इस्तेमाल किया गया था। यदि वाकई फेसबुक ने किसी दूसरे देश की चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर जनमत को प्रभावित करने की शक्ति हासिल कर ली है तो यह देश के राजनीतिक दलों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

भारत की उदारता

भारत की उदारता का फेसबुक काफी लाभ उठा रहा है। यूरोपीय महासंघ की सर्वोच्च अदालत ने फेसबुक और गूगल द्वारा यूरोप से अमेरिका को डाटा हस्तांतरित करने पर रोक लगाई हुई है, किंतु हमारे यहां उसके द्वारा सरकारी दस्तावेजों समेत फेसबळ्क के 20 करोड़ से भी ज्यादा प्रयोगकर्ताओं की सभी सूचनाएं, मसलन चित्र, वीडियो, अभिलेख, साहित्य जो भी बौद्धिक संपदा के रूप में उपलब्ध हैं, उन्हें किसी को भी हासिल कराने का अधिकार प्राप्त कर लिया है। इन जानकारियों को निजी कंपनियों को बेचकर फेसबुक खरबों की कमाई कर रहा है। इन्हीं सूचनाओं को आधार बनाकर बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय बाजार को अपनी मुट्ठी में ले रही हैं। इसके अलावा हरेक खाते से फेसबुक को औसतन सालाना 10,000 रुपये की आमदनी होती है।

15 करोड़ से भी ज्यादा भारतीय ग्राहक

फेसबुक के 20 करोड़ और वाट्सएप के 15 करोड़ से भी ज्यादा भारतीय ग्राहक हैं, किंतु फेसबुक भारत में आयकर और सेवाकर से मुक्त है। फिलहाल तो उसके पास भारत के आयकर विभाग का पैन नबंर भी नहीं है। फेसबुक के पास ‘कुकीज’ नामक ऐसी फाइलें होती हैं, जो इंटरनेट यूजरों पर निगाह रखती हैं कि एक यूजर किस वेबसाइट पर गया और उसने क्या सूचना दर्ज कराई और किस अन्य वेबसाइट को साझा की। किस पेज पर कितना समय यूजर ने किसके साथ बिताया। मसलन फेसबुक व्यक्तिगत व सामूहिक जासूसी का बड़ा माध्यम है। निगरानी की इसी वजह से बेल्जियम की एक अदालत ने उस पर 2.50 लाख यूरो का जुर्माना लगाया था।

संविधान की गरिमा

साथ ही फेसबुक को बाध्य किया था कि लोगों की सूचनाएं एकत्र करने के लिए उसको उपयोगकर्ताओं से अनुमति लेनी होगी। वैसे भारत में किसी भी दल की सरकार रही हो वह संविधान की गरिमा का पालन करते हुए समाचार माध्यमों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और देश के प्रत्येक नागरिक को बोलने की आजादी देती है। सोशल मीडिया मसलन वेबसाइटों पर भी विचारों के आदान-प्रदान की छूट है, लेकिन यदि कोई सोशल साइट भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ चुनाव प्रक्रिया को ही अपने अनुसार ढालने के षड्यंत्र में लग जाए तो यह घोर आपत्तिजनक हरकत है। लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया को कानूनी शिकंजे में लाया जाता है तो किसी को कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए।

Posted By: Kamal Verma

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