12 घंटे में पूरा हुआ 33 घंटे का सफर, एक्सप्रेसवे-टनल और वंदे भारत ने कैसे बदली देश की तस्वीर?
देश भर में बुनियादी ढांचे के विस्तार से यात्रा का समय काफी कम हो गया है। आधुनिक एक्सप्रेसवे, सुरंगों और ...और पढ़ें

भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर क्रांति (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश भर में बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का विस्तार पिछले कई वर्षों से निरंतर जारी है। इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से हो रहा विस्तार अब आम जनता के यात्रा समय में भारी कटौती के रूप में सामने आ रहा है।
केंद्र सरकार के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, आधुनिक एक्सप्रेसवे, सुरंगों, अत्याधुनिक पुलों और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के जरिए न सिर्फ दुर्गम मार्गों को आसान बनाया गया है, बल्कि घंटों की यात्रा को मिनटों में समेट दिया गया है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सफर का समय 33 घंटे से घटकर महज 12 घंटे होने जा रहा है, वहीं अटल सेतु, अटल सुरंग और कोसी रेल महासेतु जैसे प्रोजेक्ट्स घंटों का सफर मिनटों में पूरा कर रहे हैं।

इसके साथ ही अब रेलवे ने 549 ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के साथ-साथ आगामी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के जरिए देश में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के नए युग की शुरुआत कर दी है।
कैसे कम हुआ यात्रा का समय?
गौरतलब है कि जहां पहले नदियां और दुर्गम रास्ते यात्रा में घंटों का समय लेते थे, वहीं आधुनिक पुलों ने संपर्क मार्ग और यात्रा के समय में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है।
- भूपेन हजारिका सेतु (धोला-सादिया पुल)- इसने असम के रूपई और अरुणाचल प्रदेश के मेका/रोइंग के बीच यात्रा का समय 6 घंटे से घटाकर महज 1 घंटा कर दिया है।
- बोगीबील पुल- इसने धेमाजी और डिब्रूगढ़ के बीच पूरे दिन लगने वाले सफर को घटाकर केवल 1 से 2 घंटे का कर दिया है।
- अटल सेतु- मुंबई और नवी मुंबई के बीच लगने वाले लगभग 2 घंटे के समय को घटाकर महज 20 मिनट कर दिया है।
- कोसी रेल महासेतु- इसने निर्मली और सारागढ़ के बीच की रेल दूरी को 300 किमी से घटाकर मात्र 22 किमी कर दिया है, जिससे 8 घंटे का सफर अब सिर्फ 30 मिनट का रह गया है।
- अटल टनल- 9.02 किलोमीटर लंबी अटल सुरंग रोहतांग दर्रे को बाईपास करती है, मनाली-सरचू मार्ग से 46 किलोमीटर की दूरी कम करती है और चार से पांच घंटे का समय बचाती है।
- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग- इसके बनने से जम्मू-श्रीनगर की यात्रा दूरी लगभग 30 किलोमीटर कम हो जाती है और लगभग दो घंटे की बचत होती है।
- बनिहाल-काजीगुंड की दोहरी सुरंग- इससे लगभग डेढ़ घंटे की बचत होती है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग ने तेजपुर-तवांग मार्ग पर यात्रा के समय को एक घंटे से अधिक कम कर दिया है।
यात्रा के समय में कटौती
नए एक्सप्रेसवे देश के प्रमुख सड़क मार्गों पर यात्रा के समय में भारी कटौती कर रहे हैं। इन आधुनिक कॉरिडोरों से पहले लगने वाला घंटों का समय अब सिमटकर आधा या उससे भी कम हो है।

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर जहां सफर का समय ढाई घंटे से घटकर मात्र 50 मिनट रह गया है, वहीं बेंगलुरु-मैसूरु मार्ग पर यात्रा अब 3 घंटे के बजाय 75 मिनट में पूरी हो रही है। इसी तरह, दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा 6 घंटे से अधिक के सफर को ढाई घंटे में समेट देगा।
इन रूट पर चल रहा काम
आने वाले समय में दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे से दिल्ली से अमृतसर का सफर 8 घंटे से घटकर 4 घंटे और कटरा तक की यात्रा 14 घंटे से घटकर सिर्फ 6 घंटे रह जाएगी।
इसके अलावा, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पूरी तरह तैयार होने पर दोनों महानगरों के बीच लगने वाला 33 घंटे का भारी समय घटकर महज 12 घंटे में पूरा हो जाएगा।
पारंपरिक ट्रेनों के समय में भी कटौती
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रेलवे में स्पीड का विस्तार सिर्फ नई लाइनों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारंपरिक ट्रेनों को भी तेज बनाया गया है। साल 2026 की रेलवे समय-सारिणी के अनुसार, पूरे रेल नेटवर्क की 549 ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई गई है।
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इनमें से 20 ट्रेनों के यात्रा समय में कम से कम 60 मिनट की कटौती की गई है, जबकि 48 ट्रेनों का सफर 31 से 59 मिनट तक कम हुआ है। इसके अलावा, 105 ट्रेनों की गति में 16 से 30 मिनट और 376 अन्य ट्रेनों की गति में 5 से 15 मिनट तक का सुधार किया गया है।
वंदे भारत एक्सप्रेस से बदला रेल यात्रा का अनुभव
रेल नेटवर्क की स्पीड को बढ़ाने में 'वंदे भारत' सेवाओं ने सबसे अहम भूमिका निभाई है। नई दिल्ली-वाराणसी मार्ग पर चलने वाली वंदे भारत ट्रेनें पुरानी ट्रेनों की तुलना में लगभग 40-50% अधिक तेज हैं।
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इसी तरह, कटरा-श्रीनगर मार्ग पर 2 से 3 घंटे, बनारस-खजुराहो मार्ग पर लगभग 2 घंटे 40 मिनट और एर्नाकुलम-बेंगलुरु मार्ग पर 2 घंटे से अधिक समय की बचत हो रही है।
वहीं, हावड़ा और गुवाहाटी के बीच शुरू हुई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने भी यात्रा के समय को 17 घंटे से घटाकर महज 14 घंटे कर दिया है।
अब अगला चरण हाई-स्पीड रेल है। पहले चरण में 508 किलोमीटर लंबा मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर 320 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए डिजाइन किया गया है।
इसमें कुल 12 स्टेशन होंगे और ठाणे क्रीक के नीचे लगभग 7 किलोमीटर लंबी भारत की पहली समुद्र के नीचे (अंडरसी) रेल सुरंग का निर्माण शामिल है। इसके शुरू होने से मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय घटकर महज 1 घंटा 58 मिनट रह जाएगा।
सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा
सरकार ने लगभग 4,000 किलोमीटर लंबे सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की भी घोषणा की है, जिन पर अनुमानित 16 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा।
प्रस्तावित मार्गों में दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी, चेन्नई-बेंगलुरु, बेंगलुरु-हैदराबाद, चेन्नई-हैदराबाद, मुंबई-पुणे और पुणे-हैदराबाद शामिल हैं।
