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UNGA में दिखा भारत का दबदबा, जयशंकर के संबोधन से पहले 11 दिग्गज नेताओं ने की वकालत

Published: Sat, 26 Sep 2026 07:50 PM (IST)

संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संबोधन से पहले ही 11 देशों के नेताओं ने भारत का विभिन्न संदर्भों में उल्लेख किया।

UNGA में दिखा भारत का दबदबा (फोटो- PTI)

UNGA में दिखा भारत का दबदबा (फोटो- PTI)

HighLights

  1. जयशंकर के संबोधन से पहले 11 नेताओं ने भारत का उल्लेख किया

  2. सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा हुई

  3. भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संबोधन से पहले ही दुनिया के 11 देशों के नेताओं के भाषण में भारत अलग-अलग संदर्भों में छाया रहा।

सुरक्षा परिषद में सुधार, जलवायु परिवर्तन, परमाणु हथियार, हिंद-प्रशांत, व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे मुद्दों पर भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भारतीय नागरिकों का उल्लेख हुआ।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर नेताओं ने भारत की बढ़ती भूमिका और उसके साथ सहयोग की जरूरत को रेखांकित किया, जबकि कुछ ने भारतीय नागरिकों से जुड़े मुद्दे भी उठाए। बता दें कि महासभा 28 सितंबर तक चलेगी।

पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत बताते हुए भारत को स्थायी सदस्यता देने की वकालत की। उन्होंने भारत के साथ अफ्रीकी देशों और ब्राजील को भी स्थायी प्रतिनिधित्व देने की बात कही।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने जलवायु परिवर्तन से हिंदुकुश हिमालय को बढ़ते खतरे का जिक्र करते हुए नेपाल, भारत और चीन के नेतृत्व में ‘हिमालयन क्लाइमेट रिजिलिएंस मैकेनिज्म’ बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने उपग्रह आंकड़ों, ग्लेशियर झीलों की निगरानी, शुरुआती चेतावनी और आपदा प्रबंधन में सहयोग की बात कही।

नेपाल में बाढ़ के बाद मदद के लिए उन्होंने भारत और चीन का आभार भी जताया।यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति और समृद्धि से जुड़ी ‘पी4एम’ पहल में भारत की भागीदारी का उल्लेख किया। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ व्यापार वार्ता का भी जिक्र किया।

आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने हिंद-प्रशांत में भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ संबंध मजबूत करने की बात कही। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने व्यापार, दुर्लभ खनिजों और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग की चर्चा में भारत का नाम लिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने फिर भारत-पाकिस्तान संघर्ष और आपरेशन सिंदूर के बाद सैन्य कार्रवाई रोकने का श्रेय लेने का दावा किया। हालांकि, भारत लगातार अमेरिकी मध्यस्थता के दावे को खारिज करता रहा है और कहता है कि सैन्य कार्रवाई भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच सीधे संपर्क के बाद रुकी थी। इसलिए ट्रंप के बयान को उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने भारत की मदद से सीमा के पास विकसित हो रही ‘गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी’ और इसे भारत के रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजनाओं का उल्लेख किया। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत की हालिया यात्रा को याद करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून और महात्मा गांधी का जिक्र किया।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने भारत और ब्राजील को उभरती ताकत बताते हुए एआइ और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में इनके साथ काम करने की बात कही। इसके एक दिन बाद तिमोर-लेस्ते के राष्ट्रपति होजे रामोस-होर्टा ने परमाणु हथियारों के खतरे पर चर्चा करते हुए भारत को उन परमाणु-सशस्त्र देशों में शामिल बताया, जो परमाणु अप्रसार संधि के सदस्य नहीं हैं।