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ट्रंप के दावे पर नहीं लगी भारत की मुहर: रूस से तेल खरीदना जारी, क्या है मोदी सरकार का प्लान?

Published: Wed, 04 Feb 2026 09:38 PM (IST)Updated: Thu, 05 Feb 2026 01:35 AM (IST)

India Russia Oil Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दावे के बावजूद भारत ने रूस से तेल आयात जारी रखा है। ...और पढ़ें

रूस से तेल खरीद पूरी तरह बंद नहीं करेगा भारत (File Photo)

रूस से तेल खरीद पूरी तरह बंद नहीं करेगा भारत (File Photo)

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संक्षेप में पढ़ें

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। रूसी तेल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावा करने के बावजूद भारत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के आधार पर ही फैसले लेगा।

संसद में बुधवार को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता है और बदलते वैश्विक परिदृश्य में ऊर्जा स्त्रोतों का विविधीकरण इस रणनीति का हिस्सा है।  हालांकि उन्होंने किसी देश से तेल खरीद बंद करने का कोई जिक्र नहीं किया।

कुछ प्रमुख कूटनीतिक सूत्रों ने भी दैनिक जागरण को बताया कि रूस से तेल खरीद हो रही है और पिछले हफ्ते भी कुछ बड़े सौदे हुए हैं। इसके बावजूद कुल मात्रा के हिसाब से रूसी तेल का आयात पहले के मुकाबले कम होगा।

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भारत ने नहीं की ट्रंप के दावे की पुष्टि

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में क्रेता-विक्रेता के रिश्ते रातोंरात नहीं बदलते, और रूस से तेल की पूरी भरपाई वेनेजुएला या अमेरिका से करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

भारत के साथ ट्रेड डील की घोषणा करने के साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को को घोषणा की थी कि भारत रूस से तेल खरीद बंद कर अमेरिका और संभवत: वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। लेकिन भारत सरकार ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।

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भारत और रूसी तेल

  • क्रेमलिन ने भी कहा कि उसे भारत से रूस से तेल खरीद बंद करने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। उधर, भारत रूस से तेल आयात में कमी तो ला रहा है, लेकिन पूर्ण बंद की स्थिति नहीं है।
  • दिसंबर 2025 में भारत ने रूस से 13.8 लाख बैरल प्रति दिन तेल आयात किया, जो कुल आयात का 27.4 फीसद था। हालंकि जनवरी 2023 के बाद मात्रा के हिसाब से यह रूस से किया गया सबसे कम तेल आयात था।
  • जनवरी, 2026 में यह आंकड़ा और कम हो सकता है। यह भी याद रखना चाहिए कि भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर 25 फीसद अतिरिक्त शुल्क लगाने (जुलाई, 2025) के बावजूद भारत ने अपने पारंपरिक मित्र से तेल खरीद पर रोक नहीं लगाई।
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एसबीआई की शोध रिपोर्ट

गौरतलब है कि पारंपरिक रूप से भारत रूस से डेढ़ दो फीसद क्रूड लेता रहा है जिसका आकार यूक्रेन युद्ध के बाद काफी बढ़ गया था। सूत्रों का मानना है कि आज की परिस्थिति में भी भारत आठ दस फीसद से कम नहीं आएगा जो उर्जा सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है। उधर, एसबीआई की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, रूस से तेल आयात घटने लगा है।

वेनेजुएला से दूरी रूस से दोगुनी

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर वेनेजुएला भारत को तेल कीमत में 10-12 डालर प्रति बैरल की छूट दे तो भारतीय कंपनियां उससे तेल खरीद सकती है। इस रेट पर वेनेजुएला से तेल भारत खरीदे तो इससे विदेशी मुद्रा भुगतान में तीन अरब डॉलर की बचत संभव है। लेकिन वेनेजुएला से दूरी रूस से दोगुनी और मिडिल ईस्ट से पांच गुना है, जिससे शिपिंग और बीमा लागत भी उठानी होगी। साथ ही वेनेजुएला का तेल को रिफाइनिंग करने की लागत भी ज्यादा होती है। उनकी गुणवत्ता अलग होती है।

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क्या है ऑयल इंडस्ट्री का कहना?

ऑयल इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि आम तौर पर छह से आठ हफ्ते की ट्रेडिंग की डील अग्रिम होती है। रूस से मार्च तक जो तेल खरीदना है, उसका सौदा हो चुका है। सरकार की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं आया है कि उन्हें किस देश से तेल खरीदना है और किससे नहीं। अभी भी कारोबारी हित को देख कर फैसला किया जा रहा है।

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