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'एल्गोरिदम बदलने की जरूरत', डीपफेक और फर्जी खबरों पर नकेल कसने के लिए केंद्र की मेटा को दो टूक

Published: Sat, 08 Aug 2026 04:30 PM (IST)

केंद्र सरकार ने डीपफेक और फर्जी खबरों पर लगाम लगाने के लिए मेटा को अपने प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम में तुरंत सुधार करने का निर्देश दिया है।

मेटा (File Photo)

मेटा (File Photo)

HighLights

  1. केंद्र ने मेटा को एल्गोरिदम सुधारने का निर्देश दिया।

  2. डीपफेक और फर्जी खबरों पर तुरंत कार्रवाई होगी।

  3. मेटा को डेटा लोकलाइजेशन नियमों का पालन करना होगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ रहे डीपफेक, झूठे प्रचार और अजब-गजब रूप से बदले गए आपत्तिजनक वीडियो-तस्वीरें ऑनलाइन पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने शनिवार को मेटा के अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की और उन्हें अपने प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम में तुरंत सुधार करने का निर्देश दिया है। मामले में सरकार का साफ कहना है कि मेटा को इस समस्या से निपटने के लिए एक स्पष्ट कम्प्लायंस रोडमैप सौंपनी होगी।

मेटा के सामने सरकार की मुख्य मांगे क्या?

सरकार ने मेटा के सामने सबसे बड़ी और अहम मांग के तौर कार्रवाई में तेजी की बात पर जोर दिया। सरकार का कहना है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा हटाए जाने के लिए भेजे गए अनुरोधों पर अब बिना देर किए तुरंत एक्शन लिया जाना चाहिए।

एल्गोरिदम में बदलाव करने के निर्देश

इसके अलावा फर्जी खबरों, डीपफेक और प्रोपगैंडा सामग्री को खुद-ब-खुद वायरल होने से रोकने के लिए एल्गोरिदम में जरूरी बदलाव किए जाएं, ताकि ऐसी चीजें ज्यादा लोगों तक न पहुंच सकें।

सरकार चाहती है कि मेटा और अधिक सख्ती से एआई-जनरेटेड फर्जी तस्वीरों और वीडियो की पहचान करे और उन्हें तुरंत डिलीट करे। कुल मिलाकर केंद्र सरकार का कहना है कि भारत के डेटा लोकलाइजेशन नियमों का पूरी तरह से पालन किया जाए।

मेटा ने क्या सफाई दी?

मीटिंग के दौरान मेटा की तकनीकी टीम ने सरकार को बताया कि वे फिलहाल हानिकारक सामग्री से निपटने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कंपनी ने माना कि उनकी मौजूदा प्रणालियों में कुछ कमियां हैं और उन्होंने इसे ठीक करने के लिए कुछ तकनीकी उपायों का जिक्र भी किया।

हालांकि, सरकारी अधिकारियों ने इस पर असंतोष जताया और साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ बातों से काम नहीं चलेगा, बल्कि एल्गोरिदम में ठोस बदलाव करने होंगे। इस मामले पर दोनों पक्षों के बीच अगले हफ्ते फिर से एक और बैठक होने की उम्मीद है।

CSAM और डीपफेक पर पहले भी घिर चुकी है कंपनी

गौरतलब है कि हाल के दिनों में भारत सरकार की तरफ से मेटा पर शिकंजा लगातार कसा जा रहा है। बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) और डीपफेक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर सरकार ने पहले भी कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने इस तरह की गलतियों के लिए माफी भी मांगी थी।

भारत सरकार ने इस साल की शुरुआत में आईटी नियमों में संशोधन किया था, जिसके तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही एआई-जनरेटेड और भ्रामक कंटेंट को लेकर और ज्यादा बढ़ा दी गई है।