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जंगलों की आग बेकाबू, अलर्ट के बावजूद नहीं थम रही घटनाएं; अप्रैल में 50% अधिक मामले

Published: Tue, 28 Apr 2026 08:24 PM (IST)

भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) से अलर्ट मिलने के बावजूद देश में जंगल की आग की घटनाएं थम नहीं रही हैं। ...और पढ़ें

जंगल में लगातार बढ़ रही आग लगने की घटनाएं (प्रतीकात्मक फोटो)

जंगल में लगातार बढ़ रही आग लगने की घटनाएं (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. अप्रैल में जंगल की आग की घटनाएं 50% बढ़ीं।

  2. FSI के अलर्ट मैसेज के बावजूद आग बेकाबू।

  3. वन मंत्रालय ने राज्यों को रोकथाम के उपाय सुझाए।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आग लगने के पूर्वानुमान मिलने के बाद भी जंगल में आग लगने की घटनाएं थमते नहीं दिख रही हैं। इसका अंदाजा जंगल में आग लगने की घटनाओं से लगाया जा सकता है।

अप्रैल महीने में ही पिछले सालों के मुकाबले इस बार आग लगने की पचास प्रतिशत अधिक घटनाएं रिपोर्ट हुई है।

यह स्थिति तब है जब हर दिन सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर भारतीय वन सर्वेक्षण ( एफएसआइ ) आग लगने वाले संभावित वन क्षेत्रों को लेकर अलर्ट मैसेज जारी कर रही है।

ये मैसेज अगले तीन दिन तक के लिए होते है। जिसमें वनों में आग लगने से बचाने के लिए जरूरी उपाय किए जा सकते है और आग की घटनाओं को टाला जा सकता है।

जंगल में लगातार बढ़ रहीं आग लगने की घटनाएं

जंगल में आग की बढ़ती घटनाओं के बीच वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने चिंता जताई है। साथ ही राज्यों को वनक्षेत्र की आग से बचाने के लिए जरूरी उपाय करने को कहा है।

मंत्रालय की यह चिंता जब सामने आयी है, जब मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, ओडिशा व छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र आग के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील बने हुए हैं। एफएसआइ इसे लेकर लगातार अलर्ट जारी कर रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल महीने में ही जंगल में संभावित आग लगने के 77 हजार से अधिक अलर्ट मैसेज राज्यों को भेजे गए हैं। इनमें 14 हजार से अधिक आग के संभावित मैसेज मध्य प्रदेश को भेजे गए हैं।

वहीं अप्रैल के अंतिम सप्ताह ( 21 से 28 अप्रैल ) में 24 हजार से अधिक अलर्ट मैसेज भेजे गए हैं। इस बीच जंगल में बड़ी आग लगने की भी 12 सौ से अधिक घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं।

गौरतलब है कि वन क्षेत्र में आग से बचाने के लिए अलर्ट मैसेज सिस्टम शुरू किया गया था। जो सेटेलाइट की इमेज के अध्ययन के बाद संभावित वन क्षेत्रों के अधिकारियों के मोबाइल पर भेजा जाता है। इस मैसेज में वनक्षेत्र की लोकेशन भी होती है, ताकि उस क्षेत्र तक पहुंचने में दिक्कत न हो।

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