चीन-अमेरिका को टक्कर देने की तैयारी, छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए एक्शन में भारत सरकार
भारत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास में तेजी ला रहा है और फ्रांस के नेतृत्व वाले 'फ्यूचर कॉम्बैट ...और पढ़ें

छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए एक्शन में भारत सरकार। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)
HighLights
भारत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकास में आगे बढ़ रहा है।
रक्षा मंत्रालय फ्रांस के FCAS कार्यक्रम में शामिल होने की कोशिश।
संसदीय समिति ने विमान अधिग्रहण का रोडमैप मांगा है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान में अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों से पिछड़ चुका भारत छठी पीढ़ी के फाइटर जेट में पीछे नहीं रहना चाहता।
संसद की एक समिति ने कहा है कि रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस सरकार के नेतृत्व वाले छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकास कार्यक्रम-'फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम' में शामिल होने की कोशिशें शुरू कर दी है। यह पहली बार है जब भारत सरकार की ओर से इस बात को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया है।
संसदीय समिति ने मंत्रालय से ऐसे विमानों के अधिग्रहण का रोड मैप मांगा है। शुक्रवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने मंत्रालय को सलाह दी कि वह आज की हवाई-केंद्रित आधुनिक लड़ाई में भारत की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए छठी पीढ़ी के विमानों के विकास और उन्हें हासिल करने की दिशा में एक योजना तैयार करे।
संसदीय समिति को बताया गया है कि छठी पीढ़ी के विमान पर दो कंसोर्टियम काम कर रहे हैं। एक समूह में ब्रिटेन, इटली और जापान शामिल हैं। दूसरा समूह फ्रांस और जर्मनी का है। दोनों समूह विमान विकसित कर रहे हैं। भारतीय वायु सेना उन्नत विमान हासिल करने में पीछे न रह जाए, यह सुनिश्चित करने के लिए रक्षा मंत्रालय इनमें से किसी एक समूह के साथ जुड़ने की कोशिश करेगा।
उल्लेखनीय है कि काम के बंटवारे और बौद्धिक संपदा को लेकर उपजे गतिरोध के कारण फ्रांस और जर्मनी का कंसोर्टियम खटाई में पड़ता दिख रहा था। जर्मनी बौद्धिक संपदा और मुख्य तकनीकों पर अधिक हिस्सेदारी चाहता था, जबकि फ्रांस अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और नियंत्रण बनाए रखने पर अड़ा रहा। इसके बाद जर्मनी ने इस कंसोर्टियम से बाहर आने तक का संकेत दे दिया था।
लेकिन, मार्च महीने में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच बैठक के दौरान सहमति बनी कि संबंधित कंपनियों के बीच मध्यस्थता करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। इसके बाद उम्मीद है कि यह कंसोर्टियम छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान पर काम करना शुरू कर देगा।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
