विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

भारत-EU ट्रेड डील: वजन घटाने-जान बचाने वाली दवाएं होंगी सस्ती? टैरिफ खत्म होने से बड़ा असर!

Published: Tue, 27 Jan 2026 05:44 PM (IST)

भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील पर मुहर लग गई है। इससे वजन घटाने और जीवन ...और पढ़ें

क्या ट्रेड डील से भारत में सस्ती होंगी दवाएं। (X- @narendramodi)

क्या ट्रेड डील से भारत में सस्ती होंगी दवाएं। (X- @narendramodi)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील पर मुहर लग गई है। इस ट्रेड डील से कुछ दवाओं, जिनमें वजन घटाने और जान बचाने वाली दवाएं भी शामिल हैं, उन पर इपोर्ट ड्यूटी कम हो सकती है। लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि कीमतें पेटेंट, रेगूलेशन और सप्लाई चेन में फायदों को कैसे पास किया जाता है, इस पर निर्भर करेंगी।

भारत-ईयू ट्रेड रिलेशन में फार्मॉस्यूटिकल्स का एक खास स्थान है। भारत जेनेरिक दवाओं और वैक्सीन में ग्लोबल लीडर है, जबकि ईयू कई मल्टीनेशनल दवा बनाने वाली कंपनियों का घर है, जो हाई-वैल्यू, इनोवेटिव थेरेपी बनाती है। नई डील के तहत, भारत में ईयू से होने वाले ज्यादातर एक्सपोर्ट, जिनमें केमिकल, मेडिसन डिवाइस और दवाएं शामिल हैं, उन पर लगने वाले टैरिफ को धीरे-धीरे खत्म किए जाने की उम्मीद है।

पीआईबी के मुताबिक, भारत-ईयू पार्टनरशिप ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी में गहरी हुई है, जो लंबे समय से चले आ रहे सहयोग दिखाता है। यह सहयोग फार्मास्यूटिकल्स जैसे हाई-वैल्यू सेक्टर में आसान ट्रेड के लिए मंच तैयार करता है, जहां दोनों पक्षों को कम बाधाओं और मजबूत रेगुलेटरी तालमेल से फायदा होगा।

India EU

क्या ट्रेड डील से भारत में सस्ती होंगी दवाएं?

आधिकारिक बयानों के अनुसार, FTA EU एक्सपोर्ट पर 4 बिलियन यूरो तक के टैरिफ खत्म कर देगा, जिसमें फार्मास्युटिकल उत्पाद भी शामिल हैं। इससे इंपोर्टेड दवाओं, मेडिकल डिवाइस और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी कम हो सकती है।

इंपोर्टेड दवाओं के लिए, जिसमें यूरोप में बनी कुछ हाई-एंड कैंसर थेरेपी, बायोलॉजिक्स और वजन घटाने वाली दवाएं शामिल हैं, कम टैरिफ से लैंडेड कॉस्ट यानी कस्टम ड्यूटी और फ्रेट के बाद की कीमत कम हो सकती है। थ्योरी के हिसाब से, इससे डिस्ट्रीब्यूटर और अस्पतालों के लिए ऐसी दवाएं खरीदना सस्ता हो जाएगा।

भारतीय फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री की प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि यह ट्रेड डील भारत में हेल्थकेयर तक पहुंच के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकती है। हालांकि, सिर्फ टैरिफ में कमी से मरीजों के लिए कीमतें अपने आप कम नहीं हो जातीं।

क्या वजन घटाने वाली दवाएं सस्ती होगीं?

नई पीढ़ी की वजन घटाने वाली दवाएं, खासकर ओजेम्पिक, मौनजारो और वेगोवी जैसे GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट, दुनिया भर में सबसे महंगी दवाओं में से हैं। कई अभी भी पेटेंट सुरक्षा के तहत हैं, जिससे मैन्युफैक्चरर्स को सीमित प्रतिस्पर्धा के साथ कीमतें तय करने की अनुमति मिलती है।

यहां यह जानना जरूरी है कि भारत का दवा मूल्य नियामक, नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA), फिलहाल ज्यादातर मोटापे की दवाओं की कीमतों को सीमित नहीं करता है, जिसका मतलब है कि बाजार की ताकतें ही ज्यादातर कीमतें तय करती हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि कीमतों में सार्थक कमी तब होने की ज्यादा संभावना होती है जब पेटेंट खत्म हो जाते हैं और घरेलू मैन्युफैक्चरर्स जेनेरिक या बायोसिमिलर वर्जन पेश करते हैं, न कि सिर्फ टैरिफ में कटौती से।

जीवन रक्षक दवाओं पर कितना असर पड़ेगा?

इस डील का असर जीवन रक्षक दवाओं पर सबसे ज्यादा हो सकता है, खासकर उन दवाओं के लिए जो ऑन्कोलॉजी, कार्डियोलॉजी, एंडोक्रिनोलॉजी और दुर्लभ बीमारियों में इस्तेमाल होती हैं। कई एडवांस्ड थेरेपी, जिनमें कुछ कैंसर की दवाएं, इम्यूनोथेरेपी और एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी शामिल हैं, मुख्य रूप से यूरोप में बनाई जाती हैं। टैरिफ कम होने से ये सस्ती हो सकती हैं।

यह भी पढ़ें- India-EU FTA के बीच भारत ने डॉलर से दूरी बनाई, US बॉन्ड बेच खरीद डाला सोना; ट्रंप को लगी मिर्ची?