India-EU FTA: मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील का ट्रंप के टैरिफ पर कितना पड़ेगा असर?
भारत और यूरोपीय संघ ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिया है, जिसे 'मदर ऑफ ऑल ...और पढ़ें

भारत और ईयू के बीच मंगलवार को कुल 13 घोषणाएं हुई हैं
HighLights
भारत-ईयू ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया।
रक्षा और सुरक्षा साझेदारी समझौते पर पहली बार हस्ताक्षर हुए।
भारतीय प्रतिभाओं की यूरोप में आवाजाही पर भी सहमति बनी।
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। वैश्विक व्यवस्था में बढ़ती दरार, यूक्रेन से लेकर हिंद-प्रशांत तक फैले भू-राजनीतिक तनावों, चीन के साथ तनातनी और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की तरफ से टैरिफ युद्ध शुरू किए जाने के बीच भारत और यूरोपीय संघ ने अपने रिश्तों को अभूतपूर्व मजबूती देते हुए एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दे दिया है, जिसे दोनों पक्षों ने 'मदर ऑफ आल डील्स' करार दिया है।
मंगलवार को संपन्न भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व उर्सुला वान डर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा ने व्यापार और रक्षा को सहयोग के नए स्तंभ के रूप में स्थापित करते हुए न केवल एफटीए पर वार्ता के समापन की घोषणा की, बल्कि पहली बार रक्षा एवं सुरक्षा साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इसके साथ ही भारतीय प्रतिभाओं की यूरोप में आवाजाही से जुड़े समझौते समेत कुल 13 करारों पर सहमति बनी और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के साझा दृष्टिकोण के तहत वर्ष 2030 तक के लिए संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडे को मंजूरी दी गई। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित वैश्विक व्यवस्था में हो रहे तेज बिखराव के दौर में भारत-ईयू की इस साझेदारी को विश्व में स्थिरता और भरोसा जगाने वाला माना जा रहा है।
इस शिखर सम्मेलन के मंच का इस्तेमाल करते हुए प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय संघ ने न सिर्फ अपने दीर्घकालिक हितों की रक्षा करने की तरफ कदम बढ़ाया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर संदेश भी दिया है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आज भारत ने अपने इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता संपन्न किया है। यह ऐतिहासिक समझौता हमारे किसानों, हमारे छोटे उद्योगों की यूरोपीय बाजार तक पहुंच आसान बनाएगा, मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा करेगा और वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा। यह सिर्फ व्यापार समझौता नहीं है। यह साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट है।'
उन्होंने कहा, 'आज वैश्विक व्यवस्था में बड़ी उथल-पुथल है। ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ की साझेदारी अंतरराष्ट्रीय प्रणाली में स्थिरता को मजबूती देगी।'ईयू कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वान डेर लेयेन ने इस सम्मेलन को भारत-ईयू संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ करार दिया और कहा, 'हम सिर्फ अपनी अर्थव्यवस्थाओं को ही मजबूत नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक ऐसे समय में अपने नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रहे हैं, जब दुनिया पहले से कहीं अधिक असुरक्षित होती जा रही है।'
भारत और यूरोपीय संघ के बीच पहली बार की गई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी को ईयू कमीशन की प्रेसिडेंट ने 'एक ऐतिहासिक और विश्वास-आधारित मंच' बताते हुए कहा कि यूरोप और भारत के रक्षा उद्योग में साझेदारी को और गहराई दी जाएगी। विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।
वहीं, यूरोपीय परिषद के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने कहा, 'व्यापार एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक स्थिरीकरणकर्ता है। साथ ही आर्थिक विकास का मूलभूत स्त्रोत भी है। व्यापार समझौते नियम-आधारित आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करते हैं और साझा समृद्धि को बढ़ावा देते हैं। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्रों और बहुपक्षवाद के प्रबल समर्थकों के रूप में ईयू और भारत अंतरराष्ट्रीय कानून को बनाए रखने की जिम्मेदारी साझा करते हैं।'
सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी के बारे में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, 'यह दोनों पक्षों के बीच पहला ऐसा व्यापक रक्षा और सुरक्षा ढांचा है जो समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी, साइबर तथा हाइब्रिड खतरों, अंतरिक्ष, आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई आदि जैसे क्षेत्रों में संबंधों को और गहरा करेगा।' मंगलवार की बैठक में शीर्ष नेताओं की तरफ से भारत में हाल में हुईं दो आतंकी घटनाओं (पहलगाम और लाल किला हमले) की कड़े शब्दों में निंदा की गई।
साथ ही हर तरह के सीमा पार आतंकवाद समेत हर तरह की आतंकी घटनाओं की निंदा करते हुए कहा कि इसके विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और सख्त व निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है। आतंकी गतिविधियों को उकसाने वाले या उन्हें फंड उपलब्ध कराने एवं प्रशिक्षण देने के विरुद्ध भी भारत व ईयू के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी एक समझौता किया जाएगा।
दोनों पक्षों के बीच एक अहम समझौता मोबिलिटी को लेकर है। अभी भारत-यूरोपीय संघ के बीच मोबिलिटी पर व्यापक सहयोग ढांचे को अंतिम रूप दिया गया है जो दोनों ओर के कानून के मुताबिक है। इसके तहत सबसे पहले भारत में यूरोपीय लीगल गेटवे ऑफिस स्थापित किया जाएगा, जो यूरोप में रोजगार के अवसर और उसके लिए जरूरी श्रम की जरूरत के मुताबिक भारत से प्रशिक्षत व अप्रशिक्षित कामगारों को ले जाने की एक निगमित व्यवस्था देगा।
भारत और ईयू के बीच मंगलवार को कुल 13 घोषणाएं हुई हैं। इसमें वर्ष 2030 तक रणनीतिक संबंधों का एक समग्र एजेंडा भी शामिल है। इसमें ऊर्जा सुरक्षा, मोबिलिटी जैसे अहम क्षेत्रों का रोडमैप है। इस रोडमैप में आईटी व सेमीकंडक्टर से लेकर दुर्लभ धातुओं, परमाणु ऊर्जा, रक्षा क्षेत्र की निजी कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने जैसे क्षेत्र में किस तरह से आगे बढ़ाएगा, इसका विवरण है। साफ है कि जिस संबंध की नींव मंगलवार को पड़ी है, वह वर्ष 2030 तक और परवान चढ़ेगी। दोनों पक्षों के बीच वार्षिक स्तर पर वार्ता की भी सहमति बनी है।
