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ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत के लिए बड़ी खबर, रूस-अमेरिका ने कर दिया ये एलान

By Jaiprakash RanjanEdited By: Garima Singh
Published: Thu, 05 Mar 2026 08:36 PM (IST)

पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच भारत ने रूस और अमेरिका से तेल-गैस आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया था, जिस ...और पढ़ें

रूस और अमेरिका ने भारत को तेल-गैस बढ़ाने का आश्वासन दिया

रूस और अमेरिका ने भारत को तेल-गैस बढ़ाने का आश्वासन दिया

HighLights

  1. रूस और अमेरिका ने भारत को तेल-गैस बढ़ाने का आश्वासन दिया

  2. कतर से एलएनजी आपूर्ति बाधित होने पर भारत चिंतित है

  3. भारत के पास 50 दिनों का पेट्रोलियम भंडार उपलब्ध है

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्ध की शुरुआत होने के साथ ही भारत ने रूस व अमेरिका को संदेश भेज दिया था कि वह उनसे ज्यादा तेल व गैस खरीद सकता है और अब इन दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर यह आश्वासन दे दिया है कि वो भारत को आपूर्ति बढ़ाने को तैयार है।

इस आश्वासन के बावजूद ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद वैश्विक बाजार में पेट्रोलियम आपूर्ति को लेकर जो स्थिति बन रही है उससे भारत की चिंता बढ़ी है। खास तौर पर कतर में एलएनजी उत्पादन के प्रभावित होने से भारत चिंतिंत है।

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कतर से आता था 40% तेल 

भारत अपनी जरूरत का 40 फीसद एलएनजी कतर से लेता है। इन चिंताओं के बावजूद सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास फिलहाल लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार और 25 दिनों के पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक उपलब्ध है।

इससे अल्पकालिक आपूर्ति बाधा से निपटने में मदद मिलेगी। सरकार ने यह भी बताया है कि तेल उत्पादक देशों (ओपेक संगठन के सदस्य) सहित प्रमुख तेल उत्पादक देशों और सभी बड़े एलपीजी व एलएनजी आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में है।

रूस-अमेरिका के किया एलान 

भारत के दौरे पर आये अमेरिकी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी क्रिस्टोफर लांडो ने नई दिल्ली में आयोजित 'रायसीना डायलाग' के एक सत्र में कहा कि, 'मुझे उम्मीद है कि आप (भारत) वैकल्पिक स्त्रोतों (रूस के अलावा) की तलाश कर रहे हैं, अमेरिका से बेहतर कोई विकल्प नहीं है।'

फिर उन्होंने कहा कि, 'हम भारत के साथ संपर्क में है ताकि उसकी अल्पकालिक व दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकें। हम भारत की ऊर्जा विविधता के हिसाब से बेहतर स्थिति में हैं।' रूस के भारत में राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा है कि, “हम भारत को ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने के लिए हमेशा तैयार हैं।'

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पेट्रोलियम आपूर्ति बाधित होने का खतरा

ईरान पर अमेरिका व इजरायल के हमले के शुरुआत के समय से ही भारत को वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति बाधित होने का खतरा था और इस लिहाज से भारत अमेरिका और रूस, दोनों के साथ संपर्क में है। सनद रहे कि मार्च, 2022 से दिसंबर, 2025 तक रूस से लगातार काफी बड़ी मात्रा में तेल खरीदने के बाद जनवरी, 2026 से भारत ने वहां से तेल की खरीद काफी कम कर दी है।

इसका कारण अमेरिका का दबाव बताया जाता है। लेकिन मौजूदा स्थिति में भारत रूस के साथ संपर्क में है।सरकार की तरफ से मीडिया को आश्वासन दिया जा रहा है कि भारत के पास 50 दिनों का कुल पेट्रोलियम भंडार है। लेकिन कतर में गैस उत्पादन प्रभावित होने को लेकर चिंता भी जताई गई है।

कतर दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी निर्यातकों में से एक है और भारत के कुल एलएनजी आयात का लगभग 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा वहीं से आता है। पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े आंकड़ों के अनुसार भारत सालाना करीब 26 से 28 मिलियन टन एलएनजी आयात करता है, जिसमें से लगभग 10 से 12 मिलियन टन की आपूर्ति कतर से होती है। जनवरी के हालिया आंकड़ों में भी कतर की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत रही है। कतर की प्रमुख ऊर्जा कंपनी कतर इनर्जी के उत्पादन के प्रभावित होने की खबरों का असर वैश्विक गैस बाजार में दिख रहा है।

कतर ने बंद किया उत्पादन  

फरवरी, 2026 में एलएनजी की कीमतें औसतन 10 डालर प्रति एमएमबीटीयू (गैस मापने का अंतरराष्ट्रीय मानक: मेट्रिक मिलियनब्रिटिश थर्मल यूनिट) थी जो अभी 22-24 डॉलर हो चुकी है।भारत में गैस का इस्तेमाल उर्वरक उद्योग, सिटी गैस वितरण, बिजली उत्पादन और पेट्रोकेमिकल सेक्टर में बड़े पैमाने पर होता है। यदि आपूर्ति में कमी आती है तो औद्योगिक गैस आवंटन में कटौती की नौबत आ सकती है, जबकि घरेलू और उर्वरक क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाएगी।

कतर की आपूर्ति रुकने की स्थिति में भारत को स्पॉट मार्केट से महंगी एलएनजी खरीदनी पड़ सकती है या फिर ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और रूस जैसे वैकल्पिक स्त्रोतों से अतिरिक्त कार्गो मंगाने होंगे। हालांकि स्पॉट खरीदारी से आयात बिल पर दबाव बढ़ेगा और गैस आधारित बिजली उत्पादन की लागत में वृद्धि हो सकती है। इसका असर उर्वरक सब्सिडी और औद्योगिक उत्पादन लागत पर भी पड़ सकता है। इसी बीच क्रूड की कीमतें भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 82-84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं।