नई दिल्ली, एएनआइ: चीन के वुहान से निकले कोरोना वायरस से जूझ रहे विश्व के लिए भारत एक रक्षक के रूप में उभरकर सामने आया है। भारत ने दुनियाभर के देशों को न सिर्फ कोरोना संक्रमण के इलाज में प्रयोग होने वाली आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराईं, बल्कि प्रतिरक्षात्मक टीके भी मुहैया कराए। सही मायने में भारत संकट की इस घड़ी में वैश्विक फार्मेसी बन गया है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत ने पिछले साल 31 दिसंबर तक विश्व के 97 देशों को कोरोना रोधी वैक्सीन की 11.54 करोड़ डोज मुहैया कराईं। भारत ने अपने यहां पिछले साल 16 जनवरी को कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू किया था। साथ ही उसी दिन से वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम के तहत दूसरे देशों को भी वैक्सीन देनी शुरू कर दी थी।

वैक्सीन मैत्री के तहत भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ ही कई अन्य गरीब देशों को अनुदान के रूप में वैक्सीन उपलब्ध कराई है। इसके अलावा कई देशों को वैक्सीन की बिक्री भी की है तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कोवैक्स कार्यक्रम के लिए भी टीके मुहैया कराकर एक जिम्मेदार राष्ट्र की भूमिका भी निभाई है।

कोवैक्स कार्यक्रम के तहत विश्व के गरीब और निम्न आय वर्ग वाले देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई जाती है। भारत ने पड़ोसी पहले की अपनी नीति पर चलते हुए दक्षिण एशियाई देशों को सबसे ज्यादा 5.42 करोड़ डोज मुहैया कराई थी।

भारत ने सबसे ज्यादा बांग्लादेश को 2.25 करोड़ और म्यांमार को 1.86 करोड़ डोज दी थी। वहीं, नेपाल को 94.99 लाख, इंडोनेशिया को 90.08 लाख, अफगानिस्तान को 14.68 लाख, श्रीलंका को 12.64 लाख, भूटान को 5.5 लाख और मालदीव को भी 3.12 लाख डोज मुहैया कराई थी।

यूरोप के देशों में भारत से ब्रिटेन के सबसे ज्यादा 50 लाख डोज मिली थीं। वहीं, कनाडा को पांच लाख डोज और मेक्सिको को वैक्सीन की 8.7 लाख डोज भी भारत दे चुका है। संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक बल के लिए दो लाख और संयुक्त राष्ट्र के स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी 1.25 लाख डोज उपलब्ध कराए थे।

Edited By: Amit Singh