भारत में इस साल रिकॉर्ड बिजली की मांग पूरी, अगले साल 300000 मेगावाट इलेक्ट्रिसिटी की होगी जरूरत
भारत ने भीषण गर्मी में 2.71 लाख मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग सफलतापूर्वक संभाली, लेकिन अगले वित्त वर्ष में यह 3 लाख मेगावाट पार करने का अनुमान है।

भारत में इस साल रिकॉर्ड बिजली की मांग पूरी
HighLights
मई 2026 में 2.71 लाख मेगावाट की रिकॉर्ड मांग दर्ज।
अगले वित्त वर्ष में बिजली मांग 3 लाख मेगावाट पार करेगी।
एआई, डेटा सेंटर्स से 30,000 MW अतिरिक्त मांग बढ़ेगी।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भीषण गर्मी के थपेड़ों में इस साल देश ने बिजली की रिकॉर्ड मांग को सफलतापूर्वक संभाल लिया है। मई 2026 में बिजली की पीक मांग 2.71 लाख मेगावाट तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
सरकार का दावा है कि कहीं भी लंबी बिजली कटौती नहीं हुई और मांग को बिना किसी बड़े संकट के पूरा किया गया। लेकिन अब नजरें भविष्य पर टिकी हैं।
बिजली मंत्रालय का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष बिजली की मांग तीन लाख मेगावाट को पार कर जाएगी। इस हिसाब से दुनिया की प्रमुख इकॉनमी में सबसे ज्यादा तेजी से बिजली की मांग भारत में बढ़ेगी। वैसे इस साल मार्च के बाद भी बिजली की मांग लगातार बढ़ी है।
मई, 2026 में 2.71 लाख मेगावाट की पीक मांग दर्ज की गई तो, जबकि उसके बाद पीक आवर मांग 2.48 लाख से 2.65 लाख मेगावाट के बीच बनी हुई है।
इस सफलता में सौर ऊर्जा का अहम योगदान रहा, जिसने दिन के समय 70-80 हजार मेगावाट बिजली सप्लाई की और इससे पूरे दिन बिजली की आपूर्ति सही तरीके से हुई है।
बिजली सेक्टर में उपलब्ध क्षमता 2.84 लाख मेगावाट कर ली गई है जिसकी वजह से रिकार्ड मांग को पूरा करना आसान हो गया है।
बताते चलें कि देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 2014 में 2.49 लाख मेगावाट थी जो 5.42 लाख मेगावाट हो चुकी है। लेकिन असली चुनौती अब आने वाली है।
अगले साल 3 लाख मेगावाट को पार करेगी बिजली की मांग
बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने चेतावनी दी है कि अगले साल बिजली की मांग 3 लाख मेगावाट को पार करने वाली है और बिजली मंत्रालय इसके लिए तैयार है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), डेटा सेंटर्स, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और बढ़ती एयर कंडीशनिंग की मांग से अतिरिक्त 30 हजार मेगावाट बिजली की खपत बढ़ने की आशंका है।
कई रिपोर्टों के मुताबिक भारत में खुलने वाले डेटा सेंटर्स की क्षमता 2025 में करीब 1500 मेगावाट से बढ़कर 2030 तक 10 हजार मेगावाट हो जाएगी। कुछ अनुमानों में एआइ और डेटा सेंटर्स को 2030 तक 30 हजार अतिरिक्त बिजली क्षमता की जरूरत पड़ सकती है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने दोतरफा रणनीति अपना रही है। सौर ऊर्जा के विस्तार के साथ-साथ ताप बिजली परियोजनाओं को नई गति दी जा रही है।
अगले पांच वर्षों में 97 हजार मेगावाट नई ताप बिजली क्षमता जोड़ने की योजना है। जबकि वर्ष 2030 तक देश में सिर्फ अपारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से पांच लाख मेगावाट बिजली बनाने की क्षमता होगी। सरकार का मानना है कि निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए ताप बिजली क्षमता को बढ़ाना जरूरी है।
