नई दिल्ली, प्रेट्र। कोरोना की आपदा के बीच आर्थिक गतिविधियों को पटरी पर लाने की गतिविधियों को जलवायु मुद्दों से जोड़ने की कोशिशों की भारत ने आलोचना की है। दरअसल 30 और 31 अक्टूबर को रोम में जी-20 देशों की होने जा रही बैठक से पहले अमेरिका सहित अन्य विकसित देशों की ओर से विकासशील देशों पर ग्रीन तकनीक के लिए बनाया जा रहा दबाव भारत को रास नहीं आ रहा है। भारत का मानना है कि इससे विकासशील देशों में उत्पादन लागत बहुत बढ़ जाएगी।

कोरोना से उबरने की प्रक्रिया के तहत अमेरिका सख्त जलवायु एजेंडा लागू करने के लिए दबाव बना रहा है। भारत सरकार के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि महामारी से लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था को पाटरी पर लौटाने की कोशिशों के बीच व्यापार, निवेश और विकास के क्षेत्र में ग्रीन शर्ते लागू करना अर्थव्यस्था के लिए कोढ़ में खाज साबित होगा।

वित्त मंत्रालय में प्रमुख आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन गंभीर मुद्दा है। लेकिन इसे अर्थव्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने की प्रक्रिया के तौर पर नहीं लेना चाहिए। दिल्ली स्थित थिंक टैंक आरआइएस की ओर से आयोजित एक सेमिनार में उन्होंने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन संबंधी अपने संकल्पों पर दृढ़ है। वह इस क्षेत्र में बहुत कुछ करना चाहता है। लेकिन अभी हमें जी-20 के फोरम से कोई स्पष्ट संदेश नहीं मिला है।

सान्याल आर्गनाइजेशन फार इकोनमिक कोआपरेशन एंड डेवलपमेंट के उप निदेशक फ्रेड्रिको बोनगलिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। बोनगलिया ने कहा था कि विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन की नीतियों में राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन के संकट से ही कोरोना संकट पैदा हुआ है। इन मामलों को एक साथ हल करने का प्रयास होना चाहिए।

Edited By: Manish Pandey