मिडिल पावर्स की नई पहल, भारत समेत 7 देशों ने न्यूयार्क में P4M अभियान शुरू किया
भारत सहित सात देशों ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म' (P4M) अभियान शुरू किया है।

भारत समेत 7 देशों ने न्यूयार्क में P4M अभियान शुरू किया।
HighLights
भारत सहित 7 देशों ने न्यूयॉर्क में P4M अभियान शुरू किया।
वैश्विक संस्थानों में सुधार और बहुपक्षवाद को मजबूत करने का उद्देश्य।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहली बैठक की सह-अध्यक्षता की।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। यूक्रेन-रूस युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों के बाद संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक संस्थानों की नाकामी साफ दिखने लगी है। ऐसे में दुनिया के मिडिल पावर देशों ने इन संस्थानों में सुधार और उन्हें मजबूत बनाने की नई कोशिश शुरू की है। इसी कड़ी में सोमवार रात न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्च स्तरीय सप्ताह के दौरान ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म’ (पी4एम) अभियान की शुरुआत हुई।
भारत इसके संस्थापक सह-प्रायोजकों में शामिल है। यूरोपीय संघ के साथ आस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा, भारत और केन्या ने इस पहल की शुरुआत की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय परिषद अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ इसकी पहली बैठक की सह-अध्यक्षता की। जयशंकर ने कहा कि भारत को सह-प्रायोजक के रूप में शामिल होकर खुशी है।
उन्होंने कहा, “हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब वैश्विक व्यवस्था दबाव में है। दशकों से दुनिया में संतुलन बदल रहा था, जो लंबे समय से अपेक्षित संरचनात्मक बदलाव था। लेकिन अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और वास्तविक संघर्षों ने इसे बिल्कुल अलग स्वरूप दे दिया है। अगर इसे न रोका गया तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना पर ही सवाल उठ जाएगा। इसलिए इस समय बहुपक्षवाद को मजबूती से आगे आना जरूरी है।”
उन्होंने ईंधन, खाद्य, उर्वरक और वित्त को ‘4एफ संकट’ के तौर पर चिन्हित किया और अपील की इस समस्या को इनके हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। जयशंकर के मुताबिक समान विचार वाले देशों को जरूरत पड़ने पर एक साथ आने का भरोसा दिखाना चाहिए। साथ ही बहुपक्षवाद तभी सफल होगा जब अंतरराष्ट्रीय कानून, नियम और मानदंडों का सख्ती से पालन हो।
बैठक के बाद सदस्य देशों की तरफ से ‘पी4एम’ घोषणापत्र जारी किया गया। इसमें कहा गया है कि दुनिया गहरे बदलाव से गुजर रही है। बढ़ता ध्रुवीकरण, संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन तथा शक्ति राजनीति, संरक्षणवाद और दबाव का बढ़ता इस्तेमाल वैश्विक सहयोग के लिए चुनौती बन गया है। ये हालात उस समय शांति और सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं, ऐसे समय में सहयोग की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है।
व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, निवेश और विकास वित्त में भी व्यवधान आ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का नुकसान, प्रदूषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी नई तकनीकें साझा चुनौतियां हैं। इन देशों ने शांति, स्थिरता, समावेशी और सतत विकास, साझा समृद्धि तथा सभी के लिए मानव गरिमा व अधिकारों के लिए साथ काम करने का संकल्प लिया।
उन्होंने संप्रभु समानता, क्षेत्रीय अखंडता, विवादों का शांतिपूर्ण समाधान और बल प्रयोग या उसकी धमकी पर रोक जैसे सिद्धांतों की पुष्टि की। पेरिस समझौते और सतत विकास के 2030 एजेंडा को लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है।
घोषणापत्र में देशों के भीतर और उनके बीच बढ़ती असमानता को शांति व स्थिरता के लिए खतरा बताया गया है। घोषणा में संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था को जरूरी माना गया, लेकिन उसे मौजूदा चुनौतियों के अनुरूप अधिक प्रभावी, प्रतिनिधिमूलक और समावेशी बनाने के सुधार पर जोर दिया गया।
बताते चलें कि इसी दिन न्यूयार्क में वी4 भारत विदेश मंत्रियों की पहली बैठक भी हुई। इस समूह में स्लोवाकिया, पोलैंड, चेक गणराज्य और हंगरी शामिल है।
बैठक में जयशंकर के अलावा इन सभी देशों के विदेश मंत्री उपस्थित थे। दोनों बैठकें भारत की उस कूटनीति का हिस्सा हैं जिसमें मिडिल पावर देश बड़े शक्ति केंद्रों से अलग एक व्यावहारिक सहयोग मंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्य बनाने की मांग का समर्थन किया है।
