चाइल्ड पोर्नोग्राफी और ऑनलाइन अश्लीलता पर केंद्र सरकार का कड़ा रुख, जल्द आएगा सख्त कानून
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चाइल्ड पोर्नोग्राफी और गैर-सहमति वाले अश्लील वीडियो के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कानून लाने का संकेत दिया है।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर लगेगी लगाम।
HighLights
केंद्र सरकार लाएगी चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर सख्त कानून।
सोशल मीडिया मध्यस्थों की जवाबदेही होगी तय, पुलिस को सूचना।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई गहरी चिंता, व्यापक नीति की मांग।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चों की मासूमियत को कलंकित करने एवं महिलाओं की गरिमा को तार-तार करने वाले चाइल्ड पोर्नोग्राफी और वयस्कों के निजी पलों के गैर-सहमति वाले अश्लील वीडियो के प्रसार जैसे गंभीर मामलों से सख्ती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है।
मंगलवार को कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को बताया कि सरकार इस सामाजिक अभिशाप को जड़ से उखाड़ने के लिए एक व्यापक नीतिगत और विधायी ढांचे पर गंभीरता से विचार कर रही है।
मध्यस्थों की तय होगी जवाबदेही, पुलिस को देनी होगी सूचना
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार एक ऐसा व्यापक कानून लाने पर विचार कर रही है जिसके तहत सोशल मीडिया और इंटरनेट मध्यस्थों की जिम्मेदारी तथा जवाबदेही तय की जाएगी। इसके तहत केवल आपत्तिजनक सामग्री को प्लेटफॉर्म से हटाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मध्यस्थों के लिए यह अनिवार्य किया जा सकता है कि वे तुरंत पुलिस को सूचित करें कि किस व्यक्ति ने इस अश्लील सामग्री को अपलोड किया है।
इसके अलावा, नीतिगत ढांचे में केवल पीड़ित व्यक्ति ही नहीं, बल्कि किसी भी जागरूक तीसरे पक्ष द्वारा सद्भावनापूर्ण शिकायत दर्ज कराने का प्रविधान भी शामिल किया जा सकता है। सरकार इस प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों से सुझाव भी आमंत्रित करेगी।
'प्रज्वला' एनजीओ की गुहार और न्यायालय का सख्त रुख
इससे पहले, एनजीओ 'प्रज्वला' की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपर्णा भट ने कोर्ट का ध्यान इस गंभीर विसंगति की ओर आकर्षित किया कि वयस्कों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों का भारी अभाव है और यौन उत्पीड़न के वीडियो धड़ल्ले से प्रसारित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि पूर्व में बनाया गया निगरानी तंत्र अब पूरी तरह निष्प्रभावी हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने इस विकृत खतरे पर गहरी चिंता जताते हुए एक ठोस नीतिगत व्यवस्था की इच्छा जताई है। वहीं, कोर्ट ने ओटीटी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर अश्लील सामग्री के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग वाली अन्य याचिकाओं पर सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई इनपुट के साथ)
