यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 20, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
भारत 2032 तक 63,000 मेगावॉट परमाणु क्षमता बनाएगा
भारत सन् 2032 तक 63,000 मेगावॉट परमाणु क्षमता के लिए अपनी योजनाओं पर कायम रहेगा।

मुंबई, प्रेट्र : परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारतीय दावेदारी पर चीन की अनिच्छा के बावजूद भारत परमाणु ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ना जारी रखेगा। भारत सन् 2032 तक 63,000 मेगावॉट परमाणु क्षमता के लिए अपनी योजनाओं पर कायम रहेगा।
परमाणु ऊर्जा सम्मेलन के मौके पर गुरुवार को भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग के सदस्य रवि ग्रोवर ने कहा, 'हम एनएसजी का हिस्सा होना चाहते हैं। चीन सहित अन्य सदस्य देशों के साथ हमारी बातचीत चल रही है। भारत का मानना है कि चीन से इसका अच्छा नतीजा मिलेगा। लेकिन अगर ऐसा नहीं भी होता है तो हम अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर कायम रहेंगे।' मौजूदा समय में भारत के पास कुल 6000 मेगावॉट क्षमता की परमाणु ऊर्जा है। भारत की योजना है कि वर्ष 2032 तक इस क्षमता को बढ़ाकर 63,000 मेगावॉट कर दिया जाए।
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परमाणु ऊर्जा समूह (एनएसजी) परमाणु ऊर्जा की आपूर्ति करने वाले देशों का समूह है। यह समूह परमाणु अप्रसार के जरिए इसकी सामग्री, उपकरण और तकनीक के निर्यात पर नियंत्रण रखता है। उल्लेखनीय है कि भारत को इस समूह में प्रवेश लेने से रोकने के लिए चीन ने दलील दी है कि परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत नहीं करने वाले देशों को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता है।
महाराष्ट्र के जैतापुर परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट की प्रगति के बारे में पूछे जाने पर ग्रोवर ने कहा कि तकनीकी मुद्दों सहित सभी पहलुओं पर सहमति बन गई है लेकिन अभी वित्तीय मुद्दे पर निर्णय लेना बाकी है।
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