संजय मिश्र, नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी अतिक्रमण को लेकर सीमा पर जारी भारी तनाव को घटाने का रास्ता निकालने के लिए भारत और चीन के बीच मंगलवार को कोर कमांडर स्तर की बातचीत होगी। दोनों देशों की सेनाओं की सीमा पर मोर्चेबंदी के बीच बातचीत के जरिये गतिरोध का हल निकालने के लिहाज से सैन्य स्तर की इस वार्ता को अहम माना जा रहा है। वैसे गलवन घाटी के खूनी संघर्ष से बढ़े तनाव के बाद भारत ने अपना रुख कड़ा करते हुए चीन को पहले ही साफ दिया है कि तनातनी घटाने के लिए एलएसी के दोनों तरफ मई से पूर्व की यथास्थिति बहाली अनिवार्य जरूरत है।

चुशूल सेक्टर में सुबह साढ़े दस बजे शुरू होगी मीटिंग

सरकारी सूत्रों के अनुसार मंगलवार को कोर कमांडर स्तर की तीसरे दौर की वार्ता में 22 जून को कोर कमांडर स्तर की हुई वार्ता के बिन्दुओं की समीक्षा की जाएगी। कोर कमांडरों की यह वार्ता भारत के चुशूल सेक्टर में सुबह साढे दस बजे शुरू होगी। इसमें भारत का प्रतिनिधित्व सेना के 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करेंगे तो चीनी सेना की ओर से तिब्बत मिलिट्री डिस्ट्रक्ट कमान के कमांडर इसमें शरीक होंगे। कमांडर स्तर की पहली दो बैठकें 6 और 22 जून को चुशूल के निकट चीन के इलाके मोल्डो में हुई थी।

इन मुद्दों पर होगी चर्चा

सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्ष अपनी-अपनी तरफ से उठाए गए कदमों के बारे में एक दूसरे को जानकारी देंगे। इसके बाद एलएसी के उन जगहों पर बने तनाव को लेकर चर्चा होगी जहां अतिक्रमण को लेकर दोनों पक्षों में विवाद और गतिरोध है। 6 जून को कोर कमांडर स्तर की पहली वार्ता में बनी सहमति के मुद्दों पर कार्यान्वयन को मौजूदा गतिरोध के हल के लिए भारत जरूरी मान रहा है। चीन के 6 जून के समझौते से पलटने के कारण ही गलवन घाटी में खूनी संघर्ष हुआ था। जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए तो कई चीनी सैनिक भी मारे गए।

चीन की चालबाजी का नहीं स्‍वीकार करेगा भारत

कमांडर स्तर की दूसरे दौर की वार्ता के बाद भी विदेश मंत्रालय ने एलएसी पर तनाव घटाने के लिए 6 जून की वार्ता पर अमल करने की बात स्पष्ट कर दी थी। इसमें भारत ने चीन को दो टूक संदेश दे दिया था कि सैन्य मोर्चेबंदी के सहारे पूर्वी लद्दाख में एलएसी को नये सिरे परिभाषित करने की उसकी चालबाजी को भारत स्वीकार नहीं करेगा। सूत्रों के अनुसार भारत इस रुख पर कायम रहेगा कि सैन्य तनातनी घटाने के लिए एलएसी के दोनों तरफ 2 मई से पहले की यथास्थिति बहाल की जाए।

भारत के रुख से साफ है कि गलवन घाटी, फिंगर चार से आठ, पैंगोंग त्सो लेक और डेपसांग आदि इलाकों से चीनी सैनिकों के पीछे हटने की स्थिति में ही एलएसी का गतिरोध खत्म करने का रास्ता निकलेगा। इतना ही नहीं गलवन घाटी पर संप्रभुता के चीनी दावे को भी भारत सिरे से खारिज कर चुका है। माना जा रहा है कि वार्ता के बाद गतिरोध दूर करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी भारत-चीन के बीच जल्द वार्ता की संभावना है। कूटनीतिक वार्ता के लिए दोनों देशों के बीच संवाद-संपर्क चल रहा है।

 

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