केन्या में पेट्रोलियम उत्पादों का सबसे बड़ा सप्लायर बना भारत, इन दो बड़े देशों को छोड़ा पीछे
पश्चिम एशिया में होर्मुज संकट और खाड़ी क्षेत्र की रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव के बीच भारत पेट्रोलियम उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक बन गया है।

केन्या में पेट्रोलियम उत्पादों का सबसे बड़ा सप्लायर बना भारत। (रॉयटर्स)
HighLights
केन्या में भारत पेट्रोलियम उत्पादों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है।
खाड़ी संकट से भारत के पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात में 46% की वृद्धि।
रूस और तुर्किये भारतीय रिफाइंड उत्पादों के नए प्रमुख खरीदार बने।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में होर्मुज संकट और खाड़ी क्षेत्र की रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव के बीच भारत की कच्चे तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है, लेकिन यही संकट भारतीय रिफाइनरों के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात का नया दरवाजा खोल रहा है।
खाड़ी देशों की रिफाइनरियों में उत्पादन प्रभावित होने और पारंपरिक निर्यात मार्गों के बाधित होने के बाद कई देशों ने पेट्रोल और डीजल की खरीद भारत से शुरू कर दी है।
अप्रैल-अगस्त 2026 में भारत के पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात में सालाना आधार पर करीब 46 फीसद की तेजी आई है। पिछले एक हफ्ते में सऊदी अरब और रूस के प्रमुख रिफाइनरियों पर हमले के बाद भारत से पेट्रोल, डीजल व दूसरे उत्पादों का निर्यात और बढ़ने के आसार हैं।
केन्या में पेट्रोलियम उत्पादों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना भारत
ताजे आंकड़ों के मुताबिक, केन्या में भारत यूएई और सऊदी अरब को पीछे छोड़कर पेट्रोलियम उत्पादों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है। मोजाम्बिक व अन्य पूर्वी अफ्रीकी देशों में भारतीय पेट्रोल-डीजल की मांग तेजी से बढ़ी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक अफ्रीका का तकरीबन हर देश आज भारत से डीजल खरीदना चाहता है।
तुर्किये बना भारतीय पेट्रो उत्पादों का नया खरीदार
भारत व तुर्किये के बीच कूटनीतिक संबंध अच्छे नहीं है लेकिन वह भी भारतीय पेट्रो उत्पादों का नया खरीदार बन गया है। पारंपरिक बाजारों जैसे यूएई और अमेरिका को निर्यात घटा है, लेकिन नए गंतव्यों ने इसकी भरपाई कर दी है।
भारत से रिफाइंड उत्पादों की खरीद बढ़ाने को उत्सुक रूस
संकेत है कि रूस भारत से रिफाइंड उत्पादों की खरीद बढ़ाने को बहुत ही ज्यादा उत्सुक है। हेल्सिंकी स्थित सेंटर फार रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की हाल में जारी रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने अगस्त माह में 1.72 लाख टन तेल उत्पाद आयात किए, जिनकी कीमत करीब 11.4 करोड़ यूरो थी। इनमें से 70 फीसद भारत से आयात किया गया था।
आधिकारिक के मुताबिक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पेट्रोल गुजरात की नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी से लदा, मिस्र के दामिएत्ता लाइटरिंग जोन में जहाज-से-जहाज स्थानांतरण हुआ और फिर रूस के आर्कटिक बंदरगाह बेलोए मोरे पहुंचा। हालांकि आधिकारिक तौर पर भारत सरकार ने इस रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है।
भारत वैश्विक रिफाइंड ईंधन बाजार में एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब वैश्विक रिफाइंड ईंधन बाजार में एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बन रहा है। वाणिज्य मंत्रालय का डाटा बताता है कि अप्रैल-अगस्त, 2026 में “पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स” निर्यात 35.31 अरब डॉलर रहा है पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 39.43 फीसद ज्यादा है।
अकेले अगस्त में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 63.27 फीसद बढ़ कर 6.81 अरब डॉलर का हो गया है। निश्चित तौर पर इस दौरान पेट्रोलियम आयात काफी ज्यादा बढ़ा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड लगातार महंगा होता जा रहा है।
23 चालू रिफाइनरियों की कुल स्थापित क्षमता 26.7 करोड़ टन प्रति वर्ष
भारत की रिफाइनिंग क्षमता इस बदलाव का आधार है। देश में 23 चालू रिफाइनरियों की कुल स्थापित क्षमता अब 26.7 करोड़ टन प्रति वर्ष के आसपास पहुंच गई है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक इसे 30-31 करोड़ टन और लंबे समय में 45 करोड़ टन तक पहुंचाने का है।
इंडियन आयल की पानीपत, कोयली, बरौनी और पारादीप रिफाइनरियों में विस्तार परियोजनाएं 2026 के अंत तक चालू होने वाली हैं।
नुमालीगढ़ रिफाइनरी की क्षमता 30 लाख टन से बढ़ाकर 90 लाख टन करने का काम 2027 की शुरुआत में पूरा होने की उम्मीद है। राजस्थान में एचपीसीएल की नई रिफाइनरी पहले ही चालू हो चुकी है, जबकि आंध्र प्रदेश में बीपीसीएल की नई ग्रीनफील्ड परियोजना पर काम आगे बढ़ रहा है।
