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ट्रंप पर टिकीं भारत की नजरें, 100 प्रतिशत टैरिफ के बाद भी रूस से तेल खरीद बंद करने से साफ इनकार

Published: Fri, 18 Sep 2026 10:48 PM (IST)

अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा रूस व ईरान से तेल आयात पर 100% टैरिफ की घोषणा के बाद भारत की निगाहें राष्ट्रपति ट्रंप के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

अमेरिका के टैरिफ पर भारत का कड़ा रुख

अमेरिका के टैरिफ पर भारत का कड़ा रुख

HighLights

  1. अमेरिका के 100% टैरिफ पर भारत की निगाहें ट्रंप पर।

  2. भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए हर विकल्प को तैयार।

  3. अमेरिकी रुख से भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ी तल्खी।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। अमेरिका की हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस व ईरान से तेल आयात करने वाले देशों पर 100 फीसद टैरिफ लगाने की जो घोषणा की है, उसको लेकर भारत की निगाहें अब राष्ट्रपति ट्रंप पर टिकी हुई हैं।

भारतीय अधिकारी इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप इस विधेयक पर कब हस्ताक्षर करते हैं और इस बारे में उनकी क्या अंतिम नीति होती है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि भारत हर विकल्प के लिए तैयार है। भारतीय अधिकारी रूस से तेल खरीदने की नीति में बदलाव की संभावना से अभी साफ इनकार कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने अमेरिकी संसद में वोटिंग के बाद जो आधिकारिक बयान गुरुवार को दिया था, उसे हाल के वर्षों में अमेरिका के साथ रिश्तों पर भारत की सबसे सख्त टिप्पणी मानी जा रही है, लेकिन एमईए अधिकारियों से बातचीत में पता चलता है कि अंदर का माहौल इससे कहीं ज्यादा तल्ख है।

एक अधिकारी का कहना है कि “अगर अंतिम तौर पर भारत पर सौ फीसद शुल्क लगा दिया जाता है तो निश्चित तौर पर उसका भारतीय इकोनोमी पर गंभीर असर होगा, लेकिन तब भारत अपने आर्थिक फैसले लेने और 1.40 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरत को पूरा करने के लिए और स्वतंत्र होगा। हमारे लिए ना सिर्फ रूस बल्कि ईरान से भी तेल खरीदने का विकल्प खुल जाएगा।”

यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिकी संसद में वोटिंग के बाद इस मुद्दे को ट्रंप प्रशासन के समक्ष उठाया गया तो उक्त अधिकारी का कहना है कि भारत उच्च स्तर पर इस मामले में अपनी बात साफ कर चुका है। अब ज्यादा बताने की जरूरत नहीं।

विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा था कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और विविध स्रोतों से तथा बाजार की बदलती स्थितियों के आधार पर ऊर्जा खरीद जारी रखेगा।

एमईए के अनुसार हाल के महीनों में इस मुद्दे पर अमेरिकी पक्षकारों से उच्च स्तर पर चर्चा हो चुकी है और भारतीय पक्ष ने द्विपक्षीय संबंधों पर इस फैसले का संभावित असर साफ-साफ बता दिया है।

अगले हफ्ते के अंत तक विदेशमंत्री एस. जयशंकर अमेरिका दौरे पर जाने वाले हैं। जयशंकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारतीय दल का नेतृत्व करेंगे। उस दौरान उनकी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और अन्य अधिकारियों से मुलाकात संभव है। इसके साथ ही रूबियो के भी अक्टूबर 2026 में नई दिल्ली आने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक पहले ही अमेरिका की तरफ से यह संदेश भिजवाया गया है कि वह नई दिल्ली में क्वाड संगठन की विदेश मंत्रियों की बैठक के आयोजन के पक्ष में है। भारत ने अपनी तरफ से इस बैठक को लेकर कोई उत्सुकता नहीं दिखाई है लेकिन अभी यह भी नहीं कहा है कि बैठक नहीं होगी। कुछ महीने पहले ही क्वाड विदेश मंत्रियों की एक बैठक नई दिल्ली में हुई थी।

इसी तरह से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबारी समझौता (बीटीए) भी अटका हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से पारित कानून के आधार पर शुल्क लगाने के फैसले का असर बीटीए की संभावनाओं पर भी पड़ने की आशंका है। यही नहीं, अमेरिका में ही इस बार जी-20 शिखर सम्मेलन होने जा रहा है।

इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अमेरिका का जिस तरह का रुख है, उसे देखते हुए रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का उसमें हिस्सा लेना अभी से ही मुश्किल दिखाई देने लगा है।