नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। भारत और पाकिस्तान ने द्विपक्षीय वार्ताओं के नए दौर की शुरुआत कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ ही दिन पहले पेरिस में पाक पीएम नवाज शरीफ से मुलाकात कर द्विपक्षीय वार्ताओं का जो सिलसिला शुरू किया, वह रविवार को काफी आगे बढ़ा। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और पाकिस्तान के नवनियुक्त एनएसए नासिर जंजुआ के बीच थाईलैंड की राजधानी बैंकाक में चार घंटे की लंबी मुलाकात हुई। केंद्र में नई सरकार के आने के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच पूरे तरीके से एनएसए स्तर की बातचीत हुई है।

बातचीत में कश्मीर से लेकर आतंकवाद तक का मुद्दा उठा, ट्वीट कर दी बैठक की जानकारी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्वीट कर जब इस बैठक की जानकारी सार्वजनिक की तो काफी लोग चकित हुए। बैठक की खास बात यह रही कि इसमें विदेश सचिव एस. जयशंकर और उनके पाक समकक्ष एजाज अहमद चौधरी भी मौजूद थे। भारत और पाकिस्तान की तरफ से जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि बैठक बहुत ही स्पष्ट, सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक माहौल में हुई है। बैठक दक्षिण एशिया को शांतिपूर्ण व संपन्न क्षेत्र बनाने को लेकर दोनों देशों के नेताओं की दृष्टिकोण के मुताबिक की गई है। इसमें शांति व सुरक्षा, आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर, नियंत्रण रेखा पर शांति स्थापित करने समेत अन्य कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।दोनों पक्षों में यह भी सहमति बनी है कि बातचीत का दौर आगे भी जारी रहेगा।

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आइएस का मुद्दा भी उठा

जानकारों के मुताबिक एनएसए स्तरीय बातचीत में वैसे तो वे ही मुद्दे शामिल रहे, जिन पर दोनों देशों के बीच पहले भी चर्चा हो चुकी है। सिर्फ एक मुद्दे को छोड़ कर। यह मुद्दा है आइएस की दक्षिण एशिया में बढ़ती ताकत। भारत व पाकिस्तान आइएस को दुनिया के लिए बेहद खतरनाक संगठन के तौर पर पहले ही चिन्हित कर चुके हैं। एनएसए स्तर पर इसको लेकर चिंताएं जताई गईं। इससे निपटने को लेकर शुरुआती चर्चाएं हुई हैं। यह काफी अहम है क्योंकि अभी तक भारत पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है जबकि पाकिस्तान भी भारत पर अंदरुनी समस्या पैदा करने का आरोप लगाता है।

आतंक से जुड़ा डोजियर सौंपा

वैसे भारतीय एनएसए ने पाकिस्तान को आतंक से जुड़ा एक डोजियर भी सौंपा है। इसमें भारत में आतंकी कार्रवाई में पाक की खुफिया एजेंसी के हाथ होने और सीमा पर अकारण की जा रही गोलीबारी का ब्योरा भी है। यह डोजियर पिछले सितंबर में एनएसए वार्ता के लिए तैयार किया गया था। लेकिन अंतिम समय में बातचीत के रद होने की वजह से नहीं दिया जा सका था।

इसलिए चुना तीसरा देश

सूत्रों के मुताबिक बैंकाक में बातचीत का फैसला पेरिस में मोदी और शरीफ की भेंट के बाद लिया गया। यह तय किया गया कि बातचीत तीसरे देश में की जाए ताकि एक-दूसरे देश में जाने की बाध्यता और मीडिया की अपेक्षाओं से बचा जा सके। इससे पता चलता है कि दोनों पक्ष द्विपक्षीय बातचीत को लेकर कितने गंभीर हैं। मंगलवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अफगानिस्तान पर हार्ट ऑफ एशिया बैठक में हिस्सा लेने इस्लामाबाद जा रही हैं। बहुत संभव है कि उनकी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से औपचारिक भेंट हो। एनएसए बातचीत के बाद विदेश सचिव स्तरीय बातचीत भी हो सकती है। साथ ही अगले वर्ष की शुरुआत में पाकिस्तान में दक्षेस देशों की शीर्ष स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी को हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया जा चुका है।

कांग्रेस ने की आलोचना

कांग्रेस ने भारत और पाकिस्तान के एनएसए की बातचीत की आलोचना की है। पार्टी के नेता मनीष तिवारी ने इसे बहुत बड़ा धोखा बताया है। उन्होंने कहा कि यह उन सभी बातों से धोखा है, जो अब तक सरकार पर्दे के पीछे या सबके सामने कर रही थी। सरकार के 18 महीने के कार्यकाल पर नजर डालें तो आपको पता चलेगा कि पाकिस्तान को लेकर उसकी कोई एक नीति नहीं है।

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Posted By: Gunateet Ojha

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