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फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने पर लगेगी रोक, लोकसभा में विधेयक पेश

Published: Wed, 29 Jul 2026 08:28 PM (IST)

सरकार ने फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों पर अंकुश लगाने के लिए लोकसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया है।

फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने पर लगेगी रोक। (एएनआई)

फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने पर लगेगी रोक। (एएनआई)

HighLights

  1. फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों पर अंकुश लगाने विधेयक।

  2. दो साल बाद पंजीकरण पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी अनिवार्य।

  3. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में पेश किया।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जन्म और मृत्यु प्रमाण बनाने की प्रक्रिया को कड़ा करने के लिए सरकार ने जन्म और मत्यु पंजीकरण कानून में संशोधन का विधेयक लोकसभा में पेश किया है। गृह मंत्रालय की ओर से पेश किये विधेयक का उद्देश्य फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने पर अंकुश लगाना है।

विधेयक में जन्म या मृत्यु के दो साल से अधिक समय बाद प्रमाण पत्र बनाने पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी अनिवार्य करने के प्रविधान है।

दरअसल एसआईआर के दौरान कई राज्यों और खासकर पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर जन्म प्रणाण पत्र बनाए गए थे। इनमें बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिया होने की आशंका है। इसे देखते हुए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को सख्त करने का फैसला किया।

लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने ''जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026'' पेश किया। 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिले इस विधेयक में ''जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969'' की धारा 13(3) में संशोधन का प्रस्ताव है।

पेश विधेयक के अनुसार "इससे जन्म और मृत्यु की घटना की समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिलेगा"।

प्रस्तावित संशोधन के मुताबिक जन्म या मृत्यु के एक साल से दो साल के बीच पंजीकरण के लिए डीएम, एसडीएम या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी होगी।

अनुमति देने वाले अधिकारी को उसकी सत्यता की जांच करनी होगी। यदि जम्म या मृत्यु के दो साल बाद पंजीकरण का आवेदन आता है तो उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होगी, जिसमें प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य है।

तीन साल पहले भी इस अधिनियम में संशोधन किया गया था, जिसके बाद सभी राज्यों को जन्म और मृत्यु का डिजिटल रिकॉर्ड रखना और उसे हर महीने पर भारत के महा पंजीयक को भेजना अनिवार्य कर दिया गया था। अभी तक देरी की स्थिति में एसडीएम के आदेश से स्थानीय निकाय जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करते हैं।