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होर्मुज के बाद बाब अल-मंदेब की चिंता, हूती हमलों से क्रूड 100 डॉलर के पार; लाल सागर तनाव पर भारत अलर्ट

Published: Tue, 15 Sep 2026 10:30 PM (IST)

हूती हमलों के कारण बाब अल-मंदेब जलमार्ग पर बढ़ते संकट से भारत चिंतित है, जिससे तेल आपूर्ति बाधित होने और ...और पढ़ें

हूती हमलों से क्रूड 100 डॉलर के पार।  (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

हूती हमलों से क्रूड 100 डॉलर के पार। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

HighLights

  1. भारत हूती हमलों से बाब अल-मंदेब संकट पर गंभीर रूप से चिंतित है।

  2. कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर पार, 120-130 डॉलर तक जाने की आशंका।

  3. भारत ने कूटनीतिक सक्रियता बढ़ाई, ऊर्जा आपूर्ति पर लगातार नजर रख रहा।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। होर्मुज जलमार्ग से बाधित तेल आपूर्ति की समस्या जैसे-तैसे संभल ही पाई थी कि अब बाब अल-मंदेब का संकट गहराता दिख रहा है। हूती हमलों से इस मार्ग पर आवागमन प्रभावित होने के बाद भारत ने कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है और तेल आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों से संपर्क तेज कर दिया है। घरेलू स्थिति पर अंतर-मंत्रालयी समिति लगातार नजर रख रही है।

आईओसी, ओएनजीसी और गेल जैसी कंपनियां समिति को रोजाना रिपोर्ट दे रही हैं। विदेश मंत्रालय ने हालात पर गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 12 सितंबर को नई दिल्ली में सऊदी अरब के विदेश मंत्री से मुलाकात में यह मुद्दा उठाया। बाब अल-मंदेब मार्ग से भारत सऊदी तेल भी ला रहा था

भारत ने हमलों की निंदा की

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि भारत सऊदी अरब की संप्रभु जमीन पर हुए हमलों की निंदा करता है, खासकर नागरिक ढांचे और आर्थिक संपत्तियों को निशाना बनाने वाले हमलों की। ऐसे कदम क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करते हैं और बाब अल-मंदेब से आने-जाने की स्वतंत्रता को खतरा पहुंचाते हैं।

जायसवाल ने इन्हें भारत के लिए अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि उस क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति फिलहाल जारी है और शांति बहाली की उम्मीद है। भारत इसलिए चिंतित है क्योंकि लाल सागर और बाब अल-मंदेब उसकी ऊर्जा सुरक्षा के संवेदनशील रास्ते हैं। पश्चिम एशिया से आने वाले कच्चे तेल, एलपीजी और कुछ रिफाइंड उत्पादों का बड़ा हिस्सा इन्हीं जलमार्गों से गुजरता है।

भारत पर क्या होगा असर?

हूती हमले, सऊदी सुविधाओं पर हमला या जहाजों का लंबा चक्कर तीन असर डाल सकता है-खेप देर से पहुंचना, बीमा और भाड़ा बढ़ना और तेल की कीमतें चढ़ना। इसका मतलब यह नहीं कि जल्द ही भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कमी हो जाएगी। भारत एक स्रोत पर निर्भर नहीं है। रूस, खाड़ी के वैकल्पिक बंदरगाह, अफ्रीका और अन्य देशों से खरीद पहले से चल रही है।

असली खतरा तब बढ़ेगा जब लाल सागर के साथ होर्मुज जैसे दूसरे मार्ग भी लंबे समय तक ठप रहें। अभी मार्ग अस्थिर है, जोखिम बना हुआ है लेकिन आपूर्ति बाधित नहीं बताई गई है।

क्रूड फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार

लाल सागर और बाब अल-मंदेब पर बढ़े तनाव के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रूड फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गिया है। मंगलवार को ब्रेंट करीब 106 से 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। सोमवार को दोनों मानक करीब एक प्रतिशत चढ़े थे और सत्र के दौरान ब्रेंट 109 डालर के करीब भी दिख गया था।

120 से 130 डॉलर तक जा सकता है ब्रेंट

बढ़ोतरी की बड़ी वजह सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का बंद रहना है, जिसके जरिए होर्मुज को छोड़कर तेल यनबु और लाल सागर की ओर भेजा जाता था। हूती हमलों और लाल सागर मार्ग के जोखिम ने उसी वैकल्पिक रास्ते पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बाजार में अनुमान है कि पाइपलाइन अगर हफ्तों बंद रही तो ब्रेंट 120 से 130 डॉलर तक जा सकता है।