नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुवार को हुए आतंकी हमले में 41 व्यक्तियों के मारे जाने को भारत ने एक कायराना वारदात करार दिया है। लेकिन, भारत की असल चिंता इस हमले से जुड़ी सूचनाओं से है कि कुख्यात आतंकी संगठन आइएसआइएस ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और इस संगठन पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी इसे सही ठहराया है।

आइएसआइएस ने कुछ ही दिन पहले अफगानिस्तान के साथ ही कश्मीर में नए हमले की धमकी दी थी। यही वजह है कि भारत ने इस हमले की निंदा के साथ ही अफगानिस्तान को आतंक के खिलाफ लड़ाई में हरसंभव मदद करने की भी बात कही है।

अफगानिस्तान के सारे हालात पर भारत बेहद करीबी नजर रखे हुए है। भारत यह समझ रहा है कि उसका यह मित्र देश फिलहाल बेहद चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रहा है। हाल के महीनों में अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों ने आइएसआइएस और अल-कायदा के ठिकानों पर बेहद तेजी से हमला शुरु किया है। खास तौर पर नंगारहर इलाके में अमेरिकी फौज के साथ मिल कर इन दोनों संगठनों के कई ठिकाने धवस्त किये गये हैं। दूसरी तरफ काबुल व अन्य शहरी इलाकों में इस आतंकी संगठन के हमले तेज हुए हैं।

आइएसआइएस की गतिविधियों पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय जानकार मान रहे हैं कि अक्टबूर, 2017 से लेकर अभी तक आइएस ने सात बड़े हमले किये हैं। इसमें 130 लोगों की मौत हो चुकी है। सिर्फ दिसंबर के महीने में ही चार हमले हो चुके हैं। साफ है कि अमेरिका ने अफगानिस्तान के नंगारहर इलाके में अभी तक के सबसे बड़े बम ('मदर ऑफ ऑल बम्ब'-एमओएबी) गिराने का भी कोई असर नहीं हुआ है।

जानकारों का मानना है कि आइएस का अफगान में बढ़ता खतरा किसी भी लिहाज से भारत के हितों के मुताबिक नहीं होगा। यही वजह है कि इस हमले के बाद भारत की तरफ से अफगान को आतंक के खिलाफ दी जाने वाली मदद बढ़ाये जाने के आसार हैं। भारत ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में भी इस बात के संकेत दिए हैं।

सनद रहे कि सितंबर, 2017 में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री सलाहुद्दीन रब्बानी की अगुवाई में भारत अफगानिस्तान रणनीतिक साझेदारी परिषद की दूसरी बैठक के बाद भारत ने कहा था कि वह अफगानिस्तान की सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। यह भी इत्तेफाक है कि उसके बाद से ही अफगानिस्तान में आईएस की गतिविधियां बढ़ी हैं। अफगानिस्तान में आइएस की बढ़ती ताकत भारत के लिए ही नहीं बल्कि अमेरिका, पाकिस्तान समेत अन्य पड़ोसी देशों के लिए भी चिंता का कारण है। अभी तक पाकिस्तान वहां तालिबान को बढ़ावा देने में जुटा हुआ था लेकिन आइएस को लेकर वह भी संशकित है।

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Posted By: Manish Negi

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