नई दिल्ली, अनुराग मिश्र/पीयूष अग्रवाल। स्वच्छ भारत मिशन के तहत भारत ने बड़ी सफलता अर्जित की है। इसके तहत देश के लगभग हर घर में टॉयलेट का सपना साकार हुआ है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने से पहले देश की चालीस फीसदी आबादी को ही टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध थी। उस दौरान उन्होंने इस सूरत को बदलने की शपथ ली थी। 2 अक्तूबर, 2014 को उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान को लॉन्च किया था। इस अभियान का मकसद खुले में शौच को रोकना और हाथ से मैला ढोने और साफ करने की प्रवृत्ति को अगले पांच साल में समाप्त करना था।

अक्टूबर 2020 में मोदी ने अहमदाबाद की एक सभा में एलान किया था कि भारत अब खुले में शौच करने से मुक्त हो गया है। बीते पांच सालों में देश में 110 मिलियन टॉयलेट का निर्माण हुआ और 600 मिलियन लोगों को टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध हुई। अगर साल दर साल आंकड़ों की बात करें तो यह सफलता काफी बड़ी है। 2014-15 में 43.4 फीसदी लोगों को टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध थी। 2015-16 में 51.4 प्रतिशत लोगों को टॉयलेट मुहैया था। 2016-17 में 14 फीसदी से अधिक लोगों को शौचालय उपलब्ध हुआ। ऐसे में देश में 65.4 फीसदी लोगों का जीवन आसान हुआ। 2017-18 और 2018-19 में यह आंकड़ा बढ़कर क्रमश: 84.3 और 98.5 प्रतिशत हो गया। 2019-20 में सौ फीसदी लोगों के पास टॉयलेट की पहुंच हो गई। स्वच्छ भारत मिशन के आंकड़ों के अनुसार, 2 अक्तूबर, 2014 के बाद से देश में 10,71,13,973 टॉयलेट का निर्माण हुआ। 6,03,177 गांव खुले में शौच करने से मुक्त हुए। वहीं, 706 जिले भी खुले में शौच करने से फ्री हुए

स्वच्छ भारत मिशन

केंद्र ने इस मिशन को दो भागों में बांटा है। पहले भाग में स्वच्छ भारत ग्रामीण है, जिसके तहत गांवों के हर घर में शौचालय बनाने और खुले में शौच मुक्त रखने का लक्ष्य रखा गया। दूसरे भाग में स्वच्छ भारत शहरी है। इसमें घरों के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर भी शौचालय बनाने का लक्ष्य था। इसके अलावा, कूड़ा-कचरा प्रबंधन पर भी मिशन में ज्यादा फोकस किया गया।

स्वच्छता को बनाया जनआंदोलन : शेखावत

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि 6 साल पहले देश में विश्व शौचालय दिवस हो सकता है या होना चाहिए, इसकी कोई चर्चा भी नहीं थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता को जनांदोलन बना दिया। उनकी प्रेरणा से देश खुले में शौच से मुक्त हो गया। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश शौचालय निर्माण और देश को स्वच्छ बनाने के संकल्प में जुटा है। 2.55 लाख से ज्यादा सरपंच इस काम में पूरी ताकत के साथ जुटे हैं। शेखावत ने कहा कि यूरोप और विकसित देशों में जब हम देखते हैं तो वहां कोई गंदगी नहीं दिखती है, ये केवल सरकार का काम नहीं है, इसमें सभी का सहयोग निहित है। विकसित देशों में गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग रखा जाता है। अगर घर से गीला कूड़ा में सूखा कूड़ा या सूखा कूड़ा में गीला कूड़ा डाला जाता है तो उन्हें जुर्माने का सामना करना पड़ता है। हमें भी गीला और सूखा कूड़ा को अलग-अलग रखने की आदत डालनी होगी, जिससे कूड़े के निस्तारण में सहयोग मिल सके। 

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