ईवी की ओर बढ़ रहा देश का रुझान, हर चौथा स्कूटर अब बिक रहा इलेक्ट्रिक
भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, जहाँ लगभग 43% खरीदार अब इन्हें लेने पर विचार कर रहे हैं।

43% दोपहिया खरीदार अब ईवी लेने पर विचार कर रहे हैं। (AI जेनेरेटेड)
HighLights
43% दोपहिया खरीदार अब ईवी लेने पर विचार कर रहे हैं।
इलेक्ट्रिक दोपहिया की बिक्री दर पेट्रोल वाहनों से तीन गुना।
कम लागत, आराम और डिजिटल सुविधाएँ उपभोक्ताओं को पसंद।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में सक्रिय रूप से दोपहिया खरीदने वाले करीब 43 प्रतिशत लोग इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) लेने पर विचार कर रहे हैं। 2024 में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत था।
इसी तरह, ईवी को पूरी तरह से खारिज करने वालों की संख्या भी 2024 की 38 प्रतिशत से घटकर 2026 में 29 प्रतिशत पर आ गई है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की ओर से हाल में जारी एक सर्वे रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
इलेक्ट्रिक दोपहिया अपनाने की दर करीब दोगुना हुई
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में इलेक्ट्रिक दोपहिया अपनाने की दर करीब दोगुनी हुई है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक (अप्रैल-अगस्त 2026) कुल दोपहिया बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 9.9 प्रतिशत रही है, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 5.5 प्रतिशत थी।
स्कूटरों में इनकी हिस्सेदारी 16.8 प्रतिशत से बढ़कर 24.1 प्रतिशत हो गई। हर महीने करीब 1.8 लाख भारतीय पहली बार इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीद रहे हैं। अब देश में बिकने वाले करीब हर चार में से एक स्कूटर इलेक्ट्रिक है।
पेट्रोल स्कूटरों से तीन गुना है इलेक्ट्रिक की वृद्धि दर
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बिक्री की वृद्धि दर वर्ष-दर-वर्ष (सीएजीआर) आधार पर 54 प्रतिशत रही है।
यह पेट्रोल स्कूटरों की वृद्धि के मुकाबले तीन गुना से अधिक है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली फेम योजना को आगे बढ़ाने और जीएसटी सुधारों की प्रक्रिया जैसे नीतिगत बदलावों से यह तेजी आई है।
उपभोक्ताओं का मानना है कि इलेक्ट्रिक दोपहिया उनकी अधिकतर जरूरतें पूरी कर रहे हैं। मालिकों ने कम परिचालन और रखरखाव लागत, आराम, रूप-रंग, चलाने में आसानी, सामान रखने की जगह और डिजिटल सुविधाओं के लिए इन्हें अच्छी रेटिंग दी है।
ईवी के लिए खराब सड़कें चिंता का विषय
सर्वे के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए खराब सड़कें, शहर से हाईवे तक के सफर और टिकाऊपन को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। टिकाऊपन पर संदेह की एक वजह यह है कि इन वाहनों का इस्तेमाल अभी इतना लंबा नहीं हुआ है कि पेट्रोल दोपहिया से तुलना की जा सके।
बीसीजी के प्रबंध निदेशक नटराजन शंकर का कहना है कि इलेक्ट्रिक दोपहिया अब शुरुआती दौर के उपभोक्ताओं का प्रयोग नहीं हैं, बल्कि खरीदारों के लिए स्वाभाविक विकल्प बन रहे हैं। डिलीवरी चालक गति और फुर्ती चाहते हैं, जबकि छोटे शहरों के युवा भरोसेमंद और अच्छे दिखने वाले वाहन की अपेक्षा रखते हैं। इलेक्ट्रिक वाहन हर साल इन जरूरतों में से अधिक को पूरा कर रहे हैं।
(इनपुट-प्रेट्र, जागरण इन्फो)
