नवीन नवाज,जेएनएन। वादी-ए-कश्मीर में होने जा रहा स्वतंत्रता दिवस समारोह बीते 72 वर्षों के स्वतंत्रता दिवस समारोह से पूरी तरह भिन्न होगा। अनुच्छेद 370 से आजादी के बाद के पहले स्वतंत्रता समारोह में बीएसएफ की टुकड़ी का नेतृत्व देश की पहली महिला बीएसएफ अधिकारी करेगी और तिरंगे को सलामी देगी। समुद्रतल से करीब 13000 फुट की ऊंचाई पर स्थित कुपवाड़ में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर तैनात तनुश्री बीएसएफ में महिला अधिकारियों की पहले बैच 2014 की अधिकारी हैं। 

महिला एवं जेंडर मुद्दे पर शोध कर चुकी तनुश्री अपने स्कूल जीवन में एनसीसी कैडेट रह चुकी हैं। माता-पिता ने उन्हें इंजीनियर बनाने का सपना बुना था, लेकिन बीकानेर (पाकिस्तान के साथ सटा) में पैदा होने वाली तनुश्री सीमा प्रहरी बनना चाहती थी। उसके जुनून को देखते हुए उसके परिजनों ने भी उसके मिशन को पूरा करने में मदद की। 

   

मंगलवार को जब श्रीनगर के शेरे कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस समारोह की फुल ड्रेस रिहर्सल हुई तो वह सभी के आकर्षण का केंद्र थीं। होती भी क्यों नहीं, वह उत्तरी कश्मीर में जिला कुपवाड़ा में एलओसी पर तैनात बीएसएफ की एक कंपनी को बतौर सहायक कमांडेंट कमान कर रही हैं। 

मैंने अपनी मर्जी से कश्मीर को चुना 
बीएसएफ अधिकारी तनुश्री ने कहा कि मुझे जबरन कश्मीर नहीं भेजा गया है। मेरे पास विकल्प था, लेकिन मैंने कश्मीर चुना और अपने वरिष्ठजनों से कहा कि अगर एलओसी पर भेजा जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। यह पूछे जाने पर कि वह एलओसी और कश्मीर के भीतरी हालात में ड्यूटी को लेकर क्या सोचती हैं तो उन्होंने कहा कि एलओसी पर मेरा दुश्मन मेरे सामने खड़ा है।

बार्डर पर जब आप तैनात होते हो तो आपको पता है कि दुश्मन कहां है और कहां से आएगा, लेकिन जब आप कश्मीर के भीतरी हिस्सों में या देश के किसी अन्य हिस्से में कानून व्यवस्था की स्थिति की ड्यूटी में शामिल होंगे तो दुश्मन आपके चारों तरफ ही होगा। आपको ज्यादा सावधान रहना है। 

कश्मीर में ड्यूटी ज्यादा चुनौतिपूर्ण 
तनुश्री ने कहा कि पंजाब या राजस्थान की तुलना में कश्मीर में ड्यूटी ज्यादा चुनौतिपूर्ण है। यहां एलओसी हमेशा हॉट रहती है। पता नहीं कब पाकिस्तान संघर्ष विराम का उल्लंघन कर हमारे ठिकानों पर गोलाबारी शुरू कर दे। घुसपैठ की तीव्र आशंका बनी रहती है। गश्त पर जाना, चौकियों पर तैनात जवानों का हौसला बढ़ाना और दुश्मन को जवाब देने के लिए हरदम तैयार रहना यह सब जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। 

कश्मीर की लड़कियों को सिर्फ मौके का इंतजार 
कुपवाड़ा के बारे में पूछे जाने पर तनुश्री ने कहा कि मैं कश्मीर के उत्तरी कोने में तैनात हूं। कई बार स्थानीय लड़कियों और महिलाओं से मुलाकात होती है। उनके साथ बातचीत के आधार पर कह सकती हूं कि कश्मीर की लड़कियां सिर्फ मौके का इंतजार कर रही हैं। जिस दिन उन्हें मौका मिला तो वहां आपको एक नहीं अनेक तनुश्री फौज और बीएसएफ की वर्दी पहने नजर आएंगी। एक बात मैं जरूर कहूंगी कि आपके भीतर जोश और जज्बा जितना जरूरी है, परिवार का साथ भी उतना जरूरी है। अगर मां- बाप अपने बच्चों में विश्वास रखेंगे तो उन्हें उनकी मंजिल छूने से कोई नहीं रोक पाएगा। 

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Posted By: Ayushi Tyagi

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