नई दिल्‍ली [ जेएनएन ]। सरहद पर लगातार शांति का स्‍वांग रचने वाले पाकिस्‍तान की करतूत अब पूरी दुनिया के सामने आ चुकी है। पड़ोसी मुल्‍क की कथनी और करनी में फर्क का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले पांच वर्षों की तुलना में 2018 में जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से गोलीबारी की घटनाओं में तीन सौ फीसद से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते इस वर्ष सुरक्षा बल (बीएसएफ) के काफी जवान पाकिस्‍तान की फायरिंग में शहीद हुए।

इस साल अब तक जम्मू-कश्मीर में सीमापार से की गई फायरिंग में बीएसएफ के 11 जवान-अफसर शहीद हो चुके हैं। यह पिछले पांच साल में इस समयसीमा में बीएसएफ के शहीदों की सर्वाधिक संख्या है। इन्हें मिलाकर इस साल अंतरराष्ट्रीय सीमा व नियंत्रण रेखा के पार पाक फायरिंग में 51 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें 25 सुरक्षाकर्मी हैं। करीब छह माह में संघर्ष विराम उल्‍लंघन की 300 से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं।

पाकिस्‍तान ने शांति का रचा था नाटक

पिछले माह भारी गोलाबारी के मुंहतोड़ जवाब से घबराकर पाकिस्तान ने 29 मई को डीजीएमओ व चार जून को सेक्टर कमांडर स्तर के अधिकारियों की बातचीत व बैठक का स्वांग रचा और सीमा पर शांति का वादा किया था। भारतीय जवानों ने भी पहले गोली नहीं चलाने और गोली चली तो माकूल जवाब देने का वादा किया था, लेकिन पाकिस्तान बाज नहीं आया।

29 मई को भारत-पाक के सैन्य अभियान महानिदेशकों (डीजीएमओ) ने फोन पर बातचीत की थी। पाक ने शस्त्र विराम सच्चे ढंग से लागू करने का वादा किया। चार जून को जम्मू की ऑक्ट्राय चौकी पर 15 मिनट तक बीएसएफ व पाक रेंजर्स के सेक्टर कमांडर स्तर की फ्लैग मीटिंग हुई। इसमें पाक ने वादा किया कि वह सीमापार फायरिंग शुरू नहीं करेगा, बीएसएफ कमांडेंट ने कहा था कि जब उकसाया जाएगा तो ही वह बदला लेगा।

सीमापार फायरिंग का चार वर्षों का लेखाजोखा

2017 में सीमापार फायरिंग में कुल 111 घटनाएं सामने आई थीं, जबकि वर्ष 2016 में 204, 2015 में 350 और 2014 में 127 मामले सामने आए। पिछले साल गोलीबारी से सीमा सुरक्षा में लगे दो जवानों की मौत हुई थी, जबकि सात अन्य घायल हुए थे। 2016 में इसी तरह की घटनाओं में बीसीएफ के तीन जवान मारे गए थे, जबकि 10 अन्य घायल हुए थे।

इसी तरह 2015 मेँ एक बीएसएफ जवान की मौत हो गई थी और पांच घायल हो गए थे।  2014 में बीएसएफ को दो लोगों की मौत हो गई थी और 14 घायल हो गए थे। बीएसएफ ने जवाबी कार्रवाई के लिए रुस्तम, अर्जुन और भीम नाम से तीन अभियान शुरू किए थे।

 एक अधिकारी के मुताबिक, पिछले नौ दिनों से रमजान के दौरान जम्मू की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पिछले नौ दिनों से सीजफायर के चलते हालात कुछ शांत हैं लेकिन पिछले दिनों पाकिस्तान की तरफ से हुई कुछ घटनाओं ने इस फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 वर्ष   संघर्ष विराम उल्‍लंघन  शहीद सैनिक

- 2018 300  25

- 2017  111 02

- 2016 204 03

- 2015 350  01

- 2014 127  02

 

By Ramesh Mishra