नई दिल्‍ली (एजेंसी)। राजनीतिक गलियों में संसद के शीत सत्र में हो रही देरी जहां चर्चा का मुद्दा है वहीं एक रिकार्ड के जरिए पता चला है कि पिछले दस सालों में निर्विवाद तरीके से 47 फीसद विधेयक पारित किए गए हैं।

औसतन एक साल में मात्र 64-67 दिन हुए काम

संसदीय सूत्रों के अनुसार, 1952 से शुरुआती 20 साल तक के संसदीय कार्रवाई की तुलना में संसदीय घंटों में भी धीरे-धीरे कमी आती गयी है। 1952 और 1972 के बीच एक साल में संसद में 128 और 132 दिनों तक काम हुआ। पिछले दस सालों में एक साल में औसतन 64-67 दिन काम हुआ है।

निर्विवाद तरीके से पारित हुए विधेयक

एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार,निर्विवाद तरीके से विधेयकों का पारित किया जाना भी संसदीय व्‍यवस्‍था का दुरुपयोग है। रिकार्ड के अनुसार पिछले दस सालों में बिना किसी चर्चा के 47 फीसद विधेयक पारित किए गए। इनमें से 61 फीसद तो सत्र के अंतिम तीन घंटे के दौरान पारित किए गए। अंतिम दस सालों में संसदीय स्‍थायी समिति या परामर्श आयोग द्वारा जांच के बगैर 31 फीसद कानून पारित किए गए।

सांसदों की शैक्षणिक योग्‍यता और उनका वेतन

रोचक बात यह है कि पिछले पांच वर्ष में सांसदों के वेतन में चार गुना इजाफा हुआ। पिछले 20 वर्षों में सांसदों की शैक्षणिक योग्‍यता में गिरावट एक और चिंताजनक विषय है। सांसदों की निम्‍न स्‍तर की शैक्षणिक योग्‍यता के बावजूद उनके वेतन में निरंतर वृद्धि इस मामले को और चिंताजनक बनाती है। रिकार्ड के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में डॉक्‍टरेट, पोस्‍ट डॉक्‍टरेट और पोस्‍ट ग्रेजुएट डिग्री धारी सांसदों में 62 फीसद की गिरावट आयी है।

वंशवाद की राजनीति

वंशवाद की राजनीति को देखें तो, संसद में काफी कम अपवाद हैं, विशेषकर संसद में युवाओं के बीच। पिछले दस सालों में 30 वर्ष से कम उम्र वाले 71 फीसद सांसद दूसरी या तीसरी पीढ़ी के सांसद हैं और 40 साल से कम उम्र वाले 57 फीसद सांसदों के साथ भी यह है।

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Edited By: Monika Minal