नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। दिल्ली का निर्भया कांड हो या यूपी का आरुषी मर्डर केस या हरियाणा में कांग्रेस नेता की दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर हत्या का मामला, जब-जब देश के किसी कोने में बड़ा अपराध होता है, अंगुलियां सबसे पहले पुलिस पर ही उठती हैं। खस्ताहाल कानून व्यवस्था, वीवीआईपी सुरक्षा, यातायात संचालन, तफ्तीश में देरी से लेकर, आतंकवाद और नक्सलवाद की नाकामी तक का बोझ ढोने वाली हमारी पुलिस खुद कितनी मजबूत है, ये रिपोर्ट इसकी पोल खोलती है। संख्याबल के लिहाज से पुलिस की भारी कमी से जूझ रहे राज्यों में यूपी की हालत सबसे खराब है। पर्याप्त पुलिस बल वाले देशों की सूची में भारत का स्थान 18वां है।

नगालैंड में मात्र 4.42 फीसद पुलिस
पुलिस की कमी से जूझ रहा उत्तर प्रदेश अकेला राज्य नहीं है, बल्कि देश के लगभग सभी राज्यों में मौजूद जनसंख्या और जरूरतों के हिसाब से पुलिस बल की भारी कमी है। इस कमी से जूझने वाले राज्यों में यूपी के बाद दूसरा नंबर आता है बिहार का, तीसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल और चौथे नंबर पर तेलंगाना राज्य है। जनसंख्या व स्वीकृत पदों के हिसाब से देखा जाए तो पुलिस बल के मामले में सबसे खराब स्थिति नगालैंड की है। यहां स्वीकृत पदों के मुकाबले मात्र 4.42 फीसद पुलिस बल ही उपलब्ध है।

मानक से बहुत कम है देश में पुलिस बल
अपराध के बढ़ते मामले देश की लचर कानून व्यवस्था की हर रोज कलई खोलते हैं। इसे चुस्त-दुरुस्त करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल बहुत जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र के मानक के अनुसार प्रति लाख नागरिक पर 222 पुलिसकर्मी होने चाहिए, लेकिन भारत में यह आंकड़ा 144 ही है। एक तो पर्याप्त पुलिस बल नहीं है, दूसरे स्वीकृत क्षमता के करीब एक चौथाई पद खाली हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश में पुलिस के 5.28 लाख पद खाली पड़े हैं। इनमें से लगभग 1.29 लाख उत्तर प्रदेश में हैं। यहां कुल पुलिस बल की स्वीकृत क्षमता 23,79,728 हैं, जिनमें से 18,51,332 की तैनाती है।

राज्यवार पुलिस के खाली पदों का आंकड़ा
जम्मू और कश्मीर : आतंकवाद से प्रभावित प्रदेश में 87,882 स्वीकृत पदों में 10,044 पद खाली हैं।
असम : उग्रवाद प्रभावित असम में 65,987 स्वीकृत पदों में से 11,452 रिक्त पद हैं।
कर्नाटक : 1,00,243 स्वीकृत पदों में से 21,943 पदों पर नियुक्ति होनी बाकी है।
उत्तर प्रदेश : पुलिस बल की स्वीकृत क्षमता 4,14,492 है। इनमें से 2,85,540 पद भरे हुए और 1,28,952 पद रिक्त हैं।
बिहार : 1,28,286 स्वीकृत पदों में से 77,995 पदों पर पुलिसकर्मी कार्यरत हैं और यहां 50,291 पद खाली हैं।
ओडिशा : इस राज्य की पुलिस के पास 66,973 स्वीकृत पद हैं और यहां खाली पदों की संख्या 10,322 है।
छत्तीसगढ़ : नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ में स्वीकृत 71,606 पुलिस पदों में 11,916 पद खाली हैं।
हरियाणा : 61,346 पदों की स्वीकृत संख्या में से 16,844 पद खाली हैं।
नगालैंड : यहां देश की एकमात्र ऐसी पुलिस है, जहां 21,292 पदों की स्वीकृत संख्या में से 941 से अधिक कर्मियों को भर्ती किया गया है। अधिकारियों ने बड़ी संख्या में पद खाली होने के लिए धीमी भर्ती प्रक्रिया, सेवानिवृत्ति और असामयिक मृत्यु जैसे कारणों को जिम्मेदार ठहराया है।
आंध्र प्रदेश : 72,176 स्वीकृत पदों में से, 17,933 पद खाली हैं।
राजस्थान : यहां 1,06,232 स्वीकृत पदों में से 18,003 पद खाली हैं।
पश्चिम बंगाल : यहां स्वीकृत संख्या 1,40,904 है और 48,981 रिक्त पद हैं।
तेलंगाना : तेलंगाना में 30,345 पद खाली हैं। जबकि यहां 76,407 पद स्वीकृत हैं।
महाराष्ट्र : 26,195 पद खाली हैं। जबकि यहां 2,40,224 पद स्वीकृत हैं।
मध्य प्रदेश : यहां 1,15,731 स्वीकृत पदों में कुल 22,355 पद खाली हैं।
गुजरात : पुलिस की कुल 1,09,337 स्वीकृत संख्या में रिक्तियां 21,070 हैं।
झारखंड : पुलिस की कुल 79,950 स्वीकृत संख्या में रिक्तियां 18,931 हैं।
तमिलनाडु : 1,24,130 स्वीकृत पदों में से 22,420 पद खाली हैं।

एक लाख पर केवल 144 पुलिसकर्मी
2017 में राज्यों में पुलिस की स्वीकृत संख्या लगभग 28 लाख थी, लेकिन केवल 19 लाख पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की जा सकी है। यहां प्रत्येक एक लाख नागरिकों की सुरक्षा में केवल 144 पुलिसकर्मी ही तैनात हैं। जिससे भारत का हर कोना अपराध के लिहाज से संवेदनशील बना रहता है।

Posted By: Amit Singh

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