नारायणपुर, राज्‍य ब्‍यूरो। जिला मुख्यालय से करीब 61 किमी दूर कड़ेमेटा पुलिस कैंप में नक्सलियों द्वारा बुधवार रात फायरिंग की गई। रात के अंधेरे में सुरक्षा बल के जवानों पर की गई ताबड़तोड़ गोलीबारी में किसी के हताहत नहीं होने की राहत भरी खबर है। जवानों द्वारा आधुनिक हथियारो से जवाबी फायरिंग करने के बाद नक्सली भाग खड़े हुए है। घटना की पुष्टि एएसपी जयंत वैष्णव ने की है। चर्चा में उन्होंने बताया कि नक्सलियों द्वारा सुरक्षाबलों को टारगेट करने के लिए बुधवार रात के अंधेरे में गोली चलाई गई, जिसके बाद जवानों की ओर से जवाबी कार्रवाई में नक्सली भाग खड़े हुए हैं। बता दें कि पिछले डेढ़ माह से पुलिस के द्वारा बारसूर से पल्ली सड़क निर्माण कार्य को गति देने के लिए कैंप को खोला गया है।

सुरक्षा बालों के कैंप खोलने का विरोध

नक्सलियों के आधार वाले इलाके में सुरक्षा बल के जवानों के द्वारा डेरा डालकर कैंप खोलने के बाद से लगातार नक्सलियों द्वारा विरोध किया जा रहा है। बीस दिन पहले इस इलाके के करीब दो दर्जन गांव के सैकड़ों ग्रामीणों द्वारा कैंप के सामने धरना प्रदर्शन कर एक सप्ताह तक विरोध जताया गया है। इसके बाद जिला प्रशासन के द्वारा ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाने की कोशिश की गई और इस शिकायत को कैंप के सामने से उठाया गया।

ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बातचीत के दौरान गांव में स्कूल, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य केंद्र खोलने की सहमति बनी है। वहीं ग्रामीणों द्वारा पुलिस कैंप और बारसूर से पल्ली सड़क निर्माण कार्य को बंद करने की मांग की गई थी, जिसे जिला प्रशासन के अधिकारियों ने आश्वासन देकर टाल दिया है।

पहले भी हुई पुलिस और नक्‍सलियों की मुठभेड़

मालूम हो कि इस इलाके में बुधवार को पुलिस-नक्सलियों के बीच मुठभेड़ भी हुई थी, जिसमें एसटीएफ का जवान संजय बड़ा के पैर में गोली लगी है। जिसे बेहतर उपचार के लिए रायपुर रेफर किया गया है। मालूम हो कि कड़ेमेटा से छह किमी पहले कड़ेनार कैंप में आईटीबीपी के छह जवान आपसी गोलीबारी में अपनी जान गंवा चुके है।

सात दश‍क बाद बस्तर, कोंडागांव और दंतेवाड़ा सीमा में फोर्स की चहलकदमी

बस्तर, कोंडागांव और दंतेवाड़ा सीमा के अन्तर्गत आने वाले इस इलाके में सात दशक के बाद फोर्स की चहलकदमी हो रही है। इससे नक्सलियों में बौखलाहट दिख रही है। यह वही इलाका है, जहां नक्सलियों द्वारा अपहरण किए गए सीआरएपीएफ के पांच जवानों को समाजसेवी स्वामी अग्निवेश द्वारा नक्सलियों के वार्ता कर अपहृत जवानों को रिहा कराया गया था। अबूझमाड़ के बाद नक्सलियों का सबसे सेफ जोन माने जाने वाले कड़ेमेटा इलाके में नक्सली की ठौर में सुरक्षाबलों की तैनाती से माहौल गरमाया हुआ है।  

Posted By: Arun Kumar Singh

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस