जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आधार की अनिवार्यता का तर्क दे रही सरकार को सुप्रीम कोर्ट से भी बल मिलता दिख रहा है। लगभग रोजाना हो रही सुनवाई में पीठ से सवालों के रूप में यह संकेत मिलता रहा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कोई व्यवस्था बनती है तो क्या गलत है? मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने पहचान की गोपनीयता बनाए रखने की दलीलों पर फिर सवाल किया- क्या गुमनामी व्यक्ति को सरकारी लाभ लेने से वंचित नहीं करती है?

मंगलवार को एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि पहचान उजागर न करना या गुमनाम रहना व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। ये निजता के तहत आता है। किसी व्यक्ति को यूं ही पहचान सार्वजनिक करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। सुब्रमण्यम ने ये भी कहा कि आधार प्रक्रिया ने एक जीते जागते व्यक्ति को 12 अंक का नंबर बना दिया है। व्यक्ति की पहचान उससे न होकर 12 अंकों से होती है। इन दलीलों पर मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने उनसे सवाल किया कि अगर आपकी दलील ये है कि गुमनाम रहना व्यक्ति का मौलिक अधिकार है तो फिर बताइये कि क्या गुमनामी व्यक्ति को सरकारी लाभ से वंचित नहीं करती है।

जस्टिस मिश्रा ने सुब्रमण्यम से दूसरा सवाल किया कि अगर कोई असली व्यक्ति, वर्चुअल व्यक्ति बन जाता है तो क्या इससे उस व्यक्ति का अस्तित्व समाप्त हो जाता है?

आधार कानून में कहा गया है कि जिन योजनाओं के लिए समेकित निधि से पैसा आता है उनका लाभ लेने के लिए आधार नंबर की पहचान देना जरूरी है। इसके पीछे सरकार की दलील है कि ऐसा होने से गरीब और वंचित वर्ग के लिए लागू योजनाओं का लाभ कोई और नहीं ले पाएगा। हालांकि कानून को चुनौती देने वाले निजता के मौलिक अधिकार के हनन के तर्क पर आधार के लिए एकत्र किये जा रहे बायोमेट्रिक व अन्य पहचान का विरोध कर रहे हैं।

मंगलवार को कपिल सिब्बल ने अपनी बहस पूरी कर ली। सिब्बल ने कानून को रद करने की मांग करते हुए कहा कि इस मामले में आने वाला फैसला आजादी के बाद सबसे अहम फैसलों में होगा। इससे भारत की आने वाली पीढि़यों और समाज का भविष्य तय होगा। ये तय करेगा कि भारत में आगे कि क्या प्रक्रिया होगी। उन्होंने कहा कि कोर्ट को इन सब पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फैसला देना चाहिए।

उन्होंने सरकारी अधिसूचनाओं का हवाला देते हुए कहा कि बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास की कैश योजना व अन्य योजनाओं के लाभ के लिए आधार अनिवार्य है आखिर एक बंधुआ मजदूर को इस सबकी जानकारी कैसे होगी। उधर दूसरी ओर सुब्रमण्यम का भी कहना था कि अब से पहले भी लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाता था ये पहली बार नहीं हो रहा है। सरकार के पास पंचायत और प्रशासनिक स्तर पर जरूरी आंकड़े और प्रक्रिया होती थी। सुब्रमण्यम गुरुवार को भी दलीलें जारी रखेंगे।

 

Posted By: Bhupendra Singh