10 साल में सबसे साफ रही दिल्ली की आबोहवा, मुंबई की हवा हुई 'बहुत खराब'; AQI पहुंचा 322 के पार
मुंबई की हवा की गुणवत्ता काफी खराब हो गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 322 के स्तर पर पहुंच गया, ...और पढ़ें

10 साल में सबसे साफ रही दिल्ली की आबोहवा, मुंबई की हवा हुई 'बहुत खराब'
HighLights
पिछले दस वर्षों में 24 अक्टूबर को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता का सबसे अच्छा स्तर रहा
मुंबई में एक्यूआइ 322 के स्तर पर पहुंच गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है
आईएएनएस, मुंबई। मुंबई की हवा की गुणवत्ता काफी खराब हो गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 322 के स्तर पर पहुंच गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। इसके चलते वहां के लोगों में स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं देखने को मिलीं।
वहीं, दिल्ली में इससे अलग स्थिति देखने को मिली। यहां में एक्यूआइ 176 (मध्यम श्रेणी) दर्ज किया गया। प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए कड़े कदमों के कारण पिछले दस वर्षों में 24 अक्टूबर को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता का यह सबसे अच्छा स्तर रहा।
हवा की गुणवत्ता की निगरानी करने वाले आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, हवा की धीमी गति, कचरा जलाना, आसपास के इलाकों में फसलों को जलाने से निकलने वाला धुआं प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। शहर में छाई घनी धुंध के कारण लोगों में सिरदर्द, गले में खराश और आंखों में जलन की शिकायतें बढ़ गईं।
चिकित्सकों ने बच्चों और बुजुर्गों को बहुत ही जरूरी होने पर घर से निकलने की सलाह दी है। बिगड़ती स्थिति को देखते हुए बांबे हाई कोर्ट ने इसे आपातकालीन स्थिति माना है और अधिकारियों को प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों के खिलाफ सख्ती बढ़ाने का निर्देश दिया है। इस बीच, दिल्ली की स्थिति कुछ अलग ही देखने को मिली।
राष्ट्रीय राजधानी का एक्यूआइ 176 रहा, जो 'मध्यम' श्रेणी में आता है। पिछले वर्षों की तुलना में यह एक बड़ा सुधार है, क्योंकि उन वर्षों में इस समय तक सर्दियों की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण बढ़ने लगता था।
अधिकारियों ने हवा के साफ होने का श्रेय 'युद्ध स्तर' पर किए गए लगातार प्रयासों को दिया है। इनमें सड़कों की नियमित सफाई, निर्माण कार्य से निकले कचरे, नगरपालिका के कचरे को हटाना और सड़कों और धूल वाली जगहों पर बड़े पैमाने पर पानी का छिड़काव करना शामिल है।
हालांकि, अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सर्दियों के आने और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं के कारण स्थिति बदल सकती है।
