जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच मंगलवार को अहम रणनीतिक वार्ता की पूरी तैयारी हो चुकी है, लेकिन सवाल यह है कि अगर आगामी राष्ट्रपति चुनाव में अमेरिका में सत्ता परिवर्तन हो जाता है तो क्या बातचीत का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा?

रणनीतिक व सामरिक संबंधों की डोर और होगी मजबूत

यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सत्ता में आने के बाद भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करने को लेकर बातचीत का पहले से चल रहे ढांचे को बदल दिया था। वैसे जानकार मान रहे हैं कि सत्ता परिवर्तन की स्थिति में भी विचार विमर्श का तरीका चाहे जो हो, लेकिन रणनीतिक व सामरिक संबंधों की डोर और मजबूत होगी।

ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी और ओबामा के बीच नई व्यवस्था को रद कर दिया था

पीएम मोदी और पूर्व राष्ट्रपति ओबामा की वर्ष 2014 की मुलाकात में द्विपक्षीय रिश्तों की नई दिशा देने के लिए भारत-अमेरिका स्ट्रेटिजिक व कमर्शियल डायलॉग नाम से एक व्यवस्था शुरू की गई थी। इसमें दोनो तरफ के विदेश व रक्षा मंत्रियों के अलावा कैबिनेट के वित्त और वाणिज्य मंत्रियों को भी शामिल किया गया था। इसकी दो बैठकें भी हुई थी जिसमें हिंद-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य सहयोग बढ़ाने से लेकर संयुक्त तौर पर हथियार निर्माण करने और द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने की बात हुई थी। ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद इसे रद कर दिया और मौजूदा टू प्लस टू वार्ता का फैसला किया गया।

कहा गया कि रणनीतिक मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है इसलिए रक्षा व विदेश मंत्रियों की अगुवाई में बातचीत होनी चाहिए। इसकी अभी तक दो बैठकें हो चुकी हैं। तीसरी बैठक मंगलवार को होगी।

बिडेन ने कहा- अगर हम चुनाव जीतते हैं तो भारत के साथ रिश्तों को और करेंगे मजबूत

अमेरिका कुछ गिने चुने देशों के साथ ही इस तरह की रणनीतिक वार्ता करता है। सनद रहे कि ठीक एक हफ्ते बाद यानी 3 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव है। राष्ट्रपति ट्रंप को डेमोक्रेट प्रत्याशी जो बिडेन जबरदस्त टक्कर दे रहे हैं। बिडेन ने पिछले कुछ दिनों में कई बार कहा है कि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो भारत के साथ रिश्तों को और मजबूत करेंगे।

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