नई दिल्‍ली (पीटीआई)। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की उस घोषणा का स्‍वागत किया है जिसमें वैक्‍सीन और कोविड-19 से लड़ाई में जरूरी चीजों का उत्‍पादन बढ़ाने की बात कही है। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने हाल ही में अपने एक संदेश में ये साफ कर दिया था कि राज्‍यों को मुफ्त में कोरोना वैक्‍सीन उपलब्‍ध कराने की जिम्‍मेदारी केंद्र सरकार की है। उन्‍होंने ये भी कहा है कि 18-21 वर्ष की आयुवर्ग के लोगों के लिए कुछ समय के अंदर वैक्‍सीन मुहैया करवा दी जाएगी। आईएमएफ के प्रवक्‍ता गैरी राइस ने पत्रकारों से बात करते हुए ने भारत की उस घोषणा को भी सराहा है जिसमें केंद्र ने वैक्‍सीनेशन के लिए अतिरिक्‍त मदद करेगा।

राइस ने कहा कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर जितनी तेजी से बढ़ी थी अब वो लगातार तेजी से नीचे आ रही है। आईएमएफ आने वाले कुछ दिनों में भारत की ग्रोथ फोरकास्‍ट को भी रिवाइज करेगा। उनके मुताबिक भारत की अर्थव्‍यवस्‍था विश्‍व की अर्थव्‍यवस्‍था में अहम भूमिका रखती है। इसकी वजह इसका बड़ा आकार है। इसका क्षेत्रीय और वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में भी काफी बड़ा योगदान है।

आईएमएफ ने अपने इस बयान में कोरोना से होने वाली मौतों पर चिंता जताई है। आपको बता दें कि भारत में कुछ दिनों से छह हजार से अधिक मौत रिकॉर्ड की जा रही हैं जो दुनिया में सबसे अधिक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबांधन की ही बात करें तो उन्‍होंने कहा था कि भारत ने बेहद कम समय में अपनी अधिक से अधिक आबादी को कोरोना वैक्‍सीन की खुराक देकर महामारी की रोकथाम में सफलता पाई है। सरकार ने ये भी फैसला किया है कि वो राज्‍यों को दी जाने वाली 75 फीसद वैक्‍सीन की खुराकों को खरीदेगी और सप्‍लाई करेगी।

वहीं प्राइवेट अस्‍पतालों में लगाई जाने वाली वैक्‍सीन 150 रुपये प्रति खुराक दी जाएगी। आईएमएफ ने कहा है कि भारत ने युद्धस्‍तर पर इस महामारी की रोकथाम के लिए काम किया है। वैक्‍सीन के उत्‍पादन को बढ़ाने के लिए सरकार ने कमर कस रखी है। भारत कई मोर्चों पर इस महामारी से लड़ रहा है।

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