नई दिल्ली, जागरण स्पेशल। इस साल कई चक्रवाती तूफान ने भारत को प्रभावित किया है। मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों से पता चलता है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में चक्रवात और गंभीर चक्रवात की संख्या में पिछले दशक में लगभग 11% की वृद्धि हुई है, और पिछले पांच वर्षों में 32% की वृद्धि दर्ज की गई है। एक के बाद एक आए चक्रवाती तूफान ने मौसम के प्रतिमान को प्रभावित किया है। मौसम विभाग के अधिकारी के अनुसार पिछले पांचों वर्षों में आई तूफानों की तेजी ग्लोबल वार्मिंग के घातक प्रभावों के संकेत दे सकती है। 

2018 और 2019 में हर साल आए सात चक्रवात

साल 2018 से 2019 में प्रत्येक सात चक्रवात आए है। ये 1985 के बाद सबसे अधिक है इससे पहले वर्ष 1985 में सात चक्रवाती तूफानों ने भारत को प्रभावित किया था।  इसी तरह छह गंभीर चक्रवात 2018 और 2019 में भारत में आए, जो 1976 के बाद सबसे ज्यादा थे, तब सात दर्ज किए गए थे। इस साल, बेहद भयंकर चक्रवाती तूफान फानी ने अप्रैल में ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल दक्षिणी भागों को तबाह कर दिया था। एक और बहुत गंभीर चक्रवात, वायु, देश के कुछ हिस्सों में मानसून की शुरुआत में देरी कर रहा है। 

 

पुणे के मौसम विभाग के प्रमुख अनुपम कश्यप ने एक अंग्रेजी मीडिया संस्थान ने बातचीत के दौरान कहा कि  वायु, एक और बहुत ही गंभीर चक्रवात रहा, जिसने देश के कुछ हिस्सों में औसतन मानसून की शुरुआत में देरी की, इस वर्ष (2010-2019) के दौरान हर साल चार चक्रवात ने भारत को प्रभावित किया है ये1980 के बाद से पिछले दशकों में औसत से तीन से अधिक है।  पिछले पांच वर्षों में चक्रवातों की औसत संख्या पांच रही है और गंभीर चक्रवातों के लिए ये संख्या तीन है। हाल के वर्षों में चक्रवाती तूफानों की संख्या और गंभीरता में वृद्धि का संकेत है।

सबसे पहला चक्रवात पाबुक

इस साल भारत को प्रभावित करने वाला पहला चक्रवात पाबुक था, जो जनवरी में अंडमान सागर के ऊपर उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में उभरा था। हालांकि, इसने किसी भी तरह की तबाही नहीं मचाई थी।

फानी, जो 26 अप्रैल से 4 मई तक पूर्वी-मध्य हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से सटे दक्षिण-पूर्व में बना था। फानी मानसून के मौसम के दौरान 1965 से ओडिशा तट को पार करने वाला सबसे तीव्र चक्रवाती तूफान था। फानी के कारण अभी भी कुछ क्षेत्र तबाही से उभरे नहीं है।

 

वायु, महा और बुलबुल से मौसम प्रभावित

चक्रवात वायु के 10 जून से 17 जून तक अरब सागर में बनाने के कारण मानसून के केरल में चले जाने के बाद दक्षिण प्रायद्वीप और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से सारी नमी खत्म हो गई। तूफान ने इन भागों में मानसून में काफी देरी कर दी। अक्टूबर में कय्यर कर्नाटक, महाराष्ट्र और दक्षिण गुजरात में पश्चिमी तट पर भारी बारिश लेकर आया, जबकि अक्टूबर के अंत में और नवंबर की शुरुआत में महा ने कुछ ऐसा ही किया जबकि इस दौरान आमतौर पर इतनी तीव्रता के साथ बारिश नहीं होती है। महा के कारण महाराष्ट्र और दक्षिण गुजरात में भारी बारिश और नमी रही। भारी मात्रा में नमी ने महाराष्ट्र में सर्दियों आने में देरी कर दी।

सबसे हालिया गंभीर चक्रवाती तूफान बुलबुल ने सुंदरवन में गंगीय पश्चिम बंगाल के दक्षिणी हिस्सों में जीवन और संपत्ति को प्रभावित किया। हाल के चक्रवातों और उनके परिणामस्वरूप बेमौसम बारिश ने महाराष्ट्र, गुजरात, गंगीय पश्चिम बंगाल, उत्तर ओडिशा के विभिन्न स्थानों में खरीफ फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचाया है।

Posted By: Ayushi Tyagi

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