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IITs में बनेगा मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स का स्थायी कैडर, छात्रों-फैकल्टी के मनोवैज्ञानिक कल्याण के लिए बड़ा कदम

Published: Sun, 11 Oct 2026 09:08 PM (GMT+05:30)

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) छात्रों और संकाय सदस्यों के मनोवैज्ञानिक कल्याण के लिए मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों का एक स्थायी संवर्ग बनाने पर विचार कर रहे हैं।

IITs में बनेगा मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स का स्थायी कैडर।

IITs में बनेगा मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स का स्थायी कैडर।

HighLights

  1. आईआईटी छात्रों-संकाय के लिए स्थायी मानसिक स्वास्थ्य संवर्ग।

  2. हाल की छात्र आत्महत्याओं के बाद यह महत्वपूर्ण कदम।

  3. मौजूदा परामर्श सुविधाएं अपर्याप्त, दीर्घकालिक समाधान की तलाश।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) छात्रों और संकाय सदस्यों का मनोवैज्ञानिक कल्याण सुनिश्चित करने के लिए मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों का एक उचित संवर्ग बनाने पर विचार कर रहे हैं। आईआइटी के निदेशकों ने यह जानकारी दी है।

इस साल कई आईआईटी परिसर में छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं के चलते विवादों के केंद्र में रहे हैं। हालांकि, दो आईआईटी निदेशकों ने पुष्टि की कि संवर्ग बनाने की योजना हालिया आत्महत्याओं का नतीजा नहीं है, बल्कि इस पर कम से कम दो साल से विचार-विमर्श चल रहा है।

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर आईआईटी पहले भी पहल कर चुके हैं। लेकिन 18 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन हुए और छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया।

इस घटना से पहले अगस्त में आईआईटी दिल्ली के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद परिसर में आक्रोश फैल गया था। देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में हाल के वर्षों में ऐसी कई मौतें हुई हैं।

सभी परिसरों में छात्रों के लिए परामर्श की सुविधा उपलब्ध

एक आईआईटी निदेशक ने कहा, 'फिलहाल सभी परिसरों में छात्रों के लिए परामर्श की सुविधा उपलब्ध है। कुछ आईआईटी ने तीसरे पक्ष के एप की सेवाएं ली हैं, जबकि कई में परिसर के भीतर परामर्शदाता हैं। लेकिन परिसरों में छात्रों की संख्या को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है। टिकाऊ और दीर्घकालिक समाधान तलाशा जा रहा है।'

उन्होंने कहा, 'दो साल से इस बात पर विचार हो रहा है कि आईआईटी में मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों का उचित संवर्ग होना चाहिए। इससे न केवल छात्रों, बल्कि संकाय सदस्यों और परिसर में काम करने वाले किसी भी कर्मचारी को सहायता मिल सकेगी।'

देश में 23 आईआईटी कर रहे काम

देश में फिलहाल 23 आईआईटी काम कर रहे हैं। हर परिसर में छात्रों की संख्या 3,000 से 18,000 तक है। इनके अलावा संकाय सदस्य, उनके परिवार और परिसर में रहने वाला बड़ा समुदाय भी है।

एक अन्य निदेशक ने कहा, 'आईआईटी में परामर्शदाताओं, मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों के स्थायी पद बनाने की जरूरत महसूस की गई है। जब तक विशिष्ट पद नहीं बनाए जाते और उनके लिए धनराशि निर्धारित नहीं होती, तब तक संविदा पर नियुक्तियां भी संभव नहीं हैं।'

आईआईटी गांधीनगर सभी आईआईटी के लिए एक ढांचा तैयार कर रहा है, जिसमें परामर्शदाताओं, मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों के स्वीकृत पद शामिल होंगे।

पिछले साल हुई आईआईटी परिषद की बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार, तैयार होने वाला ढांचा भारतीय पुनर्वास परिषद के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगा। इसमें पदोन्नति के पर्याप्त अवसर और समय-समय पर गुणवत्ता का आकलन करने के प्रविधान होंगे, ताकि एक टिकाऊ और भरोसेमंद व्यवस्था बनाई जा सके।

बिट्स पिलानी समूह के कुलपति और आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक वी.रामगोपाल राव ध्यान दिलाते रहे हैं कि आईआईटी में इस मोर्चे पर समस्याएं 'सबके लिए एक ही तरीका' अपनाने के कारण पैदा होती हैं।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)